इसके बाद इस्त्राइल ने एलान किया था कि वह हमास का खात्मा करने के बाद ही रुकेगी, लेकिन 15 महीने की लड़ाई के बाद अब युद्ध विराम लागू हो गया है। इस्त्राइल को हमास अपना दुश्मन मानता है, लेकिन आज हम आपको अपनी इस खबर में बताएंगे कि इस्त्राइल का सबसे बड़ा दुश्मन किसे कहा जाता है। इस युद्ध के करीब 60 साल पहले एक ऐसा नेता उभरा था, जिसे बाद इस्त्राइल का सबसे बड़ा दुश्मन कहा जाने लगा। इस फिलिस्तीनी नेता की मौत के करीब 19 साल हो चुके हैं, लेकिन इसकी मौत का रहस्य आज भी अनसुलझा है। आइए जानते हैं कि आखिर वो कौन नेता था, जो इस्त्राइल से इतनी नफरत करता था।
इस फिलिस्तीनी नेता का नाम यासिर अराफात था। दरअसल, कई संगठनों को मिलाकर 1964 में एक बड़ा संगठन फिलिस्तीन मुक्ति संगठन (पीएलओ) बनाया था। जिसका मकसद था फिलिस्तीनीयों के अधिकार हासिल करना। यासिर अराफात 1968 में इसी संगठन के मुखिया बने थे। अराफात के नेतृत्व में उनके संगठन पीएलओ ने शांति के बजाय सशस्त्र संघर्ष पर अधिक जोर दिया। इस संगठन के निशाने पर हमेशा से इस्त्राइल ही रहा। विमानों का अपहरण, लोगों को बंधक बनाना और दुनियाभर में इस्त्राइली ठिकानों को निशाना संगठन का मकसद बन गया था।
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असल में अराफात इस्त्राइल के अस्तित्व के सख्त खिलाफ थे, लेकिन 1988 में उनकी छवि अचानक बदल गई और सशस्त्र संघर्ष को बढ़ावा देने वाला यह शख्स संयुक्त राष्ट्र में शांति के दूत के रूप में नजर आया। पहली बार किसी राष्ट्र के नेतृत्व न करने वाले शख्स को यह सम्मान दिया गया था। बाद में उन्हें शांति के नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया।
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माना जाता है कि नेहरू-गांधी परिवार के साथ अराफात के बहुत करीबी रिश्ते थे। कहा जाता है कि इंदिरा गांधी को वो अपनी बड़ी बहन मानते थे। यह भी कहा जाता है कि 1991 के चुनाव अभियान के दौरान उन्होंने राजीव गांधी पर होने वाले जानलेवा हमले को लेकर आगाह भी किया था।
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यासिर अराफात की मौत की खबर 11 नवंबर, 2004 को मिली थी। बताया गया कि उनकी मौत बीमारी के कारण हुई, लेकिन कुछ ही महीनों बाद यह दावा किया गया कि उनकी मौत जहर से हुई है और इसका इस्त्राइल पर आरोप लगा। इसके बाद जांच के लिए उनके शव को कब्र से निकाला गया। स्विट्जरलैंड के वैज्ञानिकों ने यह दावा किया कि उनके शव के अवशेषों में रेडियोधर्मी पोलोनियम-210 मिला था। हालांकि, अब भी उनकी मौत दुनिया के लिए एक पहेली ही बनी हुई है, जिसपर से शायद ही कभी पर्दा उठ पाए।