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दुनिया का वो क्रूर जल्लाद, जिसने अपने ही 17 'दोस्तों' को फांसी पर लटकाया

Fri, 31 Jan 2020 01:42 PM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जल्लाद बाबुल मियां - फोटो : Pixabay/BBC
ये तो आप जानते ही होंगे कि जल्लादों का काम जेल में बंद उन अपराधियों को फांसी पर लटकाने का होता है, जिन्हें अदालत द्वारा मौत की सजा मिली हो। वैसे तो दुनिया में बहुत कम ही जल्लाद हैं, लेकिन जो हैं वो काफी चर्चित हैं। आज हम आपको एक ऐसे ही जल्लाद के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसने जेल में बंद अपने ही 17 'दोस्तों' को एक-एक कर फांसी पर लटकाया। यह शायद दुनिया का इकलौता जल्लाद है, जिसने ऐसा किया है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस जल्लाद का नाम है बाबुल मियां और ये बांग्लादेश का रहने वाला है। सबसे हैरानी की बात तो ये है कि बाबुल मियां को एक कत्ल के जुर्म में 31 साल जेल की सजा मिली थी, लेकिन बाद में उन्होंने जेल अधिकारियों के कहने पर जल्लाद का पेशा चुन लिया। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बाबुल मियां बताते हैं कि उन्हें नहीं पता कि आखिर उन्हें जल्लाद बनने के लिए क्यों चुना गया, लेकिन जेल प्रमुख ने उनसे कहा था कि अगर वो जल्लाद बन जाएं तो उनके द्वारा दी गई हर फांसी पर उनकी सजा दो महीने कम कर जाएगी, जिसे उन्होंने मान लिया और बन गए जल्लाद। खास बात ये कि जेल में रहते उनके कई दोस्त बन गए थे, जो किसी न किसी जुर्म में सजा काट रहे थे। लेकिन जब एक-एक कर उन लोगों को अदालत द्वारा सजा-ए-मौत मिली तो उन्ही दोस्तों या साथियों को बाद में बाबुल मियां ने फांसी पर लटका दिया। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
लगभग 21 साल जेल में बिताने के बाद साल 2010 में बाबुल मियां को क्षमादान मिला और उन्हें रिहा कर दिया गया था। साल 1989 में बाबुल मियां जब 17 साल के थे, तभी उन्हें जेल हुई थी। हालांकि उनका कहना था कि उन्हें जिस जुर्म के लिए सजा मिली है, वो जुर्म उन्होंने किया ही नहीं था, बल्कि उनके बड़े भाई ने किया था। उनके बड़े भाई को भी 12 साल और एक अन्य भाई को 10 साल की सजा मिली थी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बाबुल मियां बताते हैं कि उन्हें जल्लाद बनने के लिए जेल की ओर से प्रशिक्षण दिया गया। उन्हें बताया गया कि फांसी का तख्ता कैसे तैयार करना है और फंदा कैसे बनाना है। इसके अलावा सबसे जरूरी बात उन्हें ये बताई गई थी कि फांसी पर लटकाने वाले की आंखों में कभी नहीं देखना है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
आपको जानकर हैरानी होगी कि बांग्लादेश में फांसी को लेकर एक परंपरा है, जिसके हिसाब से फांसी की सजा हमेशा आधी रात को बारह बज कर एक मिनट पर ही दी जाती है। इस बारे में कैदी और उनके परिजनों को एक दो दिन पहले सूचना दे दी जाती है।  
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बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान अपने परिवार के साथ - फोटो : Social media
बाबुल मियां बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान के पांच हत्यारों को भी साल 2010 में फांसी पर लटका चुके हैं और वो सभी वहां के सैन्य अधिकारी थे। साल 1975 में बांग्लादेश में तख्तापलट करने के लिए इन सैन्य अधिकारियों ने तत्कालीन राष्ट्रपति शेख मुजीबुर्रहमान के आवास पर हमला बोल दिया था और राष्ट्रपति सहित उनकी पत्नी, उनके तीन बेटे और दो बहुओं समेत 20 अन्य लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। 
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