प्रतीकात्मक तस्वीर
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बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बाबुल मियां बताते हैं कि उन्हें नहीं पता कि आखिर उन्हें जल्लाद बनने के लिए क्यों चुना गया, लेकिन जेल प्रमुख ने उनसे कहा था कि अगर वो जल्लाद बन जाएं तो उनके द्वारा दी गई हर फांसी पर उनकी सजा दो महीने कम कर जाएगी, जिसे उन्होंने मान लिया और बन गए जल्लाद। खास बात ये कि जेल में रहते उनके कई दोस्त बन गए थे, जो किसी न किसी जुर्म में सजा काट रहे थे। लेकिन जब एक-एक कर उन लोगों को अदालत द्वारा सजा-ए-मौत मिली तो उन्ही दोस्तों या साथियों को बाद में बाबुल मियां ने फांसी पर लटका दिया।