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देवी के रजस्वला होने पर लगता है यहां मेला, जानिए कामाख्या देवी के रहस्य

Wed, 22 Jun 2016 03:43 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
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कामाख्या मंदिर - फोटो : amar ujala
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यूं तो हमारे देश में लड़कियों के रजस्वला होने पर उन्हें हेय की नजर से देखा जाता है लेकिन इसी देश में देवी के रजस्वला होने पर एक खास मेला लगता है।
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गोवाहाटी में हर साल ब्रह्मपुत्र के किनारे अम्बुबाची मेला लगता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि ये कामाख्या देवी के रजस्वला होने की खुशी में मनाया जाता है। तंत्र मंत्र की देवी कही जाने वाली कामाख्या देवी के रजस्वला होने के मौके पर चलने वाला ये मेला तीन दिन तक चलता है।

गजब बात ये है कि इस दौरान ब्रह्मपुत्र का पानी उन तीन दिनों तक लाल रहता है। किवदंती है कि पानी का यह लाल रंग कामाख्या देवी के मासिक धर्म के कारण होता है।
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जानिए कामाख्या मंदिर में क्यों बंद कर दिया जाता है तीन दिनों के लिए।
 
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कामाख्या मंदिर - फोटो : economydecoded.com
गुवाहाटी से 8 किमी दूर नीलाचल पर्वत पर स्थित कामाख्या मंदिर कई रहस्य संजोए हुए हैं। पुराणों में कहा गया है कि जब शिव ने देवी के पार्थिव शरीर को लेकर तांडव किया तो यहां सती देवी का योनि भाग गिरा था। यही वजह है कि यह मंदिर सती देवी की योनि का प्रतिनिधित्व करता है। एक समतल चट्टान के बीच बना विभाजन देवी की योनि को दर्शाता है। वहीं एक प्रकृतिक झरने के वजह से यह जगह हमेशा गीली रहती है।

कामाख्या मंदिर - फोटो : economydecoded.com
इसी उपलक्ष्य में यहां हर साल अम्बुबाची मेला लगता है। तीन दिन बाद श्रद्धालुओं की मंदिर में भीड़ उमड़ती है, ताकि सभी देवी के माहवारी से गीले हुए कहड़े को प्रसाद के रूप में ले सके।
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कामाख्या मंदिर - फोटो : tourmyindia.com
देवी के माहवारी के तीन दिनों तक मंदिर के द्वार बंद रहते हैं। मंदिर के दरवाज़ो को चौथे दिन खोला जाता है, जब देवी की माहावारी खत्म हो जाती है।
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