देश के पांच सितारा होटल ताज, ओबेरॉय, ट्राइडेंट, हयात के बारे में तो सुना होगा, लेकिन क्या आपने कभी सुना है कि किसी पालतू जानवर के लिए भी कोई होटल है। जहां सिर्फ पालतू कुत्ते ही रह सकते हैं। वह भी इन पांच सितारा होटलों जैसी सुख-सुविधाओं के साथ। अगर नहीं तो बता दें कि साइबर सिटी में देश का पहला पांच सितारा पेट्स होटल ‘क्रिटेरती’ खुला है।
छह मंजिला इस होटल में पेट डॉग के लिए डीलक्स रूम, जूनियर सूट रूम, रॉयल सूट रूम, स्पा, कैफे, मसाज पार्लर, स्वीमिंग पूल और भी बहुत कुछ है। इसके साथ डॉग के लिए टीवी, म्यूजिक और झरना भी है। उन पर निगरानी रखने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हैं।
डीएलएफ फेज-4 में क्रिटेरती लोगों के लिए किसी अजूबे से कम नहीं है। अपने नए कॉन्सेप्ट के कारण यह धीरे-धीरे बहुत प्रसिद्ध हो रहा है। हाल ही में शुरू हुए इस पेट्स होटल के 1200 से अधिक सदस्य बन गए हैं।
इसमें सभी डॉग लवर है, जो अपने डॉग को परिवार के सदस्य के तरह रखते हैं और अपने बच्चे की तरह तवज्जो देते हैं। उनके लिए विदेशी कपड़े भी यहां मौजूद है, जो भारतीय बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं होते हैं। जल्द ही यहां पालतू बिल्लियों के लिए भी एक फ्लोर शुरू होना वाला है।
पेट्स लवर्स के लिए होटल में मैट्रीमोनियल की भी सुविधा है। यहां लोग अपने डॉग की शादी भी करवाते हैं। बर्थ-डे पार्टी भी मनाते हैं। किसी पेट लवर्स के पास पार्टी में शरीक होने के लिए आदमी नहीं हैं, तो इसका भी इंतजाम किया जाता है।
सीओओ जाह्नवी बताती है कि डॉग की शादी के लिए पहले उसके मालिक से एक रजिस्ट्रेशन फॉर्म भराया जाता है। फिर उसकी जोड़ी ढूंढी जाती है। जोड़ी ढूंढने के बाद दोनों पेट्स के बीच दोस्ती कराई जाती है और जब दोनों घुल-मिल जाते हैं तो उनके मालिकों को बताया जाता है और फिर शादी कराई जाती है।
होटल की चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (सीओओ) जाह्नवी चावला कहती है कि यह देश में बिल्कुल नया कॉन्सेप्ट है। अमेरिका में इस तरह का कल्चर है, लेकिन हिन्दुस्तान में नहीं है। पेट्स की साइकोलॉजी समझकर क्रिटेरती में सुविधा दी जाती है। यहां पर सभी ट्रेंड डॉग लवर्स है। हर नस्ल के डॉग को उसके साइकोलॉजी के हिसाब से ट्रेनिंग और खानपान दिया जाता है।
यहां पर डे बोर्डिंग, नाइट स्टे, खेलने के अलावा मसाज, हेयर कटिंग, ग्रूमिंग, स्वीमिंग, म्यूजिक सभी उपलब्ध हैं। होटल के हर कमरे को डॉग साइकोलॉजी के अनुरूप तैयार किया गया है। इसमें बालकोनी, डबल बेड, सिंगल बेड जैसी सुविधाएं हैं। हर सुविधा के लिए अलग-अलग पैकेज हैं।
कैसे आया आइडिया
होटल के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर दीपक चावला कहते हैं कि जाह्नवी को जर्मन शेफर्ड डॉग ब्लैकी से बहुत प्यार था। उसकी तबीयत खराब होने के बाद कई बार डॉक्टर को दिखाया, लेकिन सही नहीं हो पाया। जब भी परिवार के लोग बाहर घूमने जाते तो कहां छोड़ें, इसकी दिक्कत आती थी। जब ब्लैकी की मौत हो गई तब हम लोगों ने पेट्स को लेकर काम करना शुरू किया। डेढ़ वर्ष तक इसके कॉन्सेप्ट पर काम किया। रिसर्च के बाद डॉग साइकोलॉजी समझने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन और दुबई में ट्रेनिंग ली। इसके बाद दुबई में नौकरी भी की।
ये हैं होटल में एंट्री के नियम
होटल में हर डॉग सीधे एंट्री नहीं कर सकता। एंट्री करने से पहले पेट्स का वजन होता है। उसकी पूरी जानकारी ली जाती है। डॉक्टर चेक करते हैं कि कोई बीमारी तो नहीं है। उसके बाद यदि कोई इन्फेक्शन या एलर्जी है तो उसे वैक्सीन किया जाता है। इसके बाद उसे एक कार्ड भी जारी किया जाता है, जिससे पुष्टि होती है कि वह पूरी तरह स्वस्थ है। दूसरे पेट्स डॉग या इंसान को उससे कोई नुकसान नहीं है। इस कार्ड से डॉग और उसका मालिक होटल में कहीं भी जा सकता है।