क्या कभी मादा कुत्ता हरे रंग के बच्चे को जन्म दे सकती है? इस साल एक स्पैनिश कुतिया ने सभी को हैरत में तब डाल दिया जब उसके दो पिल्ले हरे रंग के पैदा हुए।
मिरर के मुताबिक इससे पहले कभी किसी ने भी कुत्ते के हरे होने की कल्पना भी नहीं की थी। लेकिन दो पिल्लों को हरा देखकर सभी के हैरान रह गए। इसमें से एक नर पिल्ला था और एक मादा।
डॉक्टरों ने बताया कि सभी पिल्लों में हरे रंग वाले दोनों पिल्ले बेहद कमजोर और इनएक्टिव थे। जन्म के थोड़े दिनों बाद ही हरे रंग की मादा पिल्ले की मौत हो गई।
कुत्ते की देखभाल करने वाले मालिक ने कहा कि उसे हरे कुत्ते देखकर लगा कि वो गंदे हैं और इसलिए उसे नहलाया भी। लेकिन फिर भी उनकी रंगत नहीं गई।
मादा कुत्ते की मौत के कई दिनों बाद उसने बताया कि हरे रंग वाले नर कुत्ते का रंग धीरे-धीरे ही छूटने लगा। कुत्ते हरे रंग के पैदा क्यों हुए इस बात की जांच हो रही है।
तीन आंखों वाली गाय देखी है कभी?
अजब-गजब शरीर वाले लोगों को तो आपने पहले कई बार देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी ऐसी गाय देखी जिसके पास दो नहीं बल्कि तीन आंखें हैं?
डेली मेल के मुताबिक तमिलनाडु के कोल्हाथूर नाम की जगह पर इस साल ऐसी एक बछड़े ने जन्म लिया जिसकी तीन आंखें हैं। इसकी दो आंखें तो एकदम ठीक जगह पर हैं, लेकिन तीसरी आंख हिंदु धर्म के भगवान शिव की तरह माथे पर बीचोबीच है।
इस अनोखे बछड़े के जन्म के बाद से लोग इस भगवान शिव का साक्षात अवतार मानने लगे हैं और इसकी पूजा करने के लिए लोगों का तांता रोज ही लगता है।
बछड़े के मालिक राजेश कहते हैं कि भगवान ने उनके गांव में चमत्कार किया और जन्म लिया है। उन्हें ऐसा लगता है कि ये बछड़ा गांव में अच्छी किस्मत की बरसात करेगा।
एक आंख वाला घोड़ा, माथे पर है इसकी आंख
मिरर में छपी खबर के इस साल मुताबिक डेनमार्क के कोपनहेगन में एक घोड़े ने सभी वैज्ञानिकों को उसके अस्तित्व को लेकर अचंभे में डाल रखा है।
एक ऐसा घोड़े के बच्चे का शव जिसकी आंखें ही नहीं थी। वो माथे के बीचोबीच थी और वो भी सिर्फ एक।
देखने में तो वो किसी हाल घोड़े का बच्चा लग ही नहीं रहा था। वो किसी गधे जैसा दिख रहा था। इस घोड़े के बच्चे का नाम साइक्लोप्स रखा गया है।
दरअसल ये एक अंग्रेजी का शब्द है जिसका मतलब है ऐसा दानव जिसकी एक आंख होती है। ये शब्द ग्रीक और रोमन माइथॉली में पॉपुलर है। घोड़े का ये अजीबोगरीब बच्चा डेनमार्क के जीलैंड में पैदा हुआ था पिछली गर्मियों में और फिर फौरन ही मर गया था।
उसके मृत शरीर को यूनिवर्सिटी ऑफ कोपनहेगन में जांच के लिए भेज दिया गया था। साल भर बाद अब जाकर वहां के प्रोफेसर हनरिक ईवेंग जेंसन ने बताया कि ये जानवर किसी भयानक म्यूटेशन या यूं कहें कि अविकसित जीन का शिकार हो गया था।
सांप भी कर लेते हैं सुसाइड?
हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के केर्न्स के रहने वाले मैट हैगन ने एक ऐसा वीडियो पोस्ट किया जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने एक जहरीले सांप को तब देखा जब वो अपनी ही गर्दन को मुंह में पकड़े हुए था।
बाद में उसकी मौत हो गई। या यूं कहें कि उसने अपना सुसाइड खुद ही कर लिया। हैगन पेशे से स्नेक कैचर हैं और उन्होंने बताया कि हो सकता है उसने सुसाइड किया हो।
अपने ही जहर के फैल जाने की वजह से वो खुद को मार डालते हैं। ऐसे प्रमाण पाए गए लेकिन पुष्टि नहीं हुई है।
कुछ महीनों पहले एक ऐसा ही वीडियो सामने आया था।
सील और पेंग्विन में बने संबंध, पूरी दुनिया अवाक!
साल 2014 में जानवरों के ऐसे कई बर्ताव हैं जिन्होंने वैज्ञानिकों को उलझन में डाला।
हाल ही में सब-अंटार्कटिक इंडियन ओशियन यानी के हिंद महासागर स्थित मेरियॉन द्वीप में कई सीलों को पेंग्विनों के साथ जबरन सेक्स करते देखा गया।
इस अजीबोगरीब घटना में जहां कुछ देर बाद तीन सील पेंग्विनों को छोड़कर चले गए, वहीं एक सील ने पेंग्विन को मार डाला।
देखा गया कि उस सील को पेंग्विन का पलटवार और दूर भगाने की कोशिश रास नहीं आई और उसने वहीं के वहीं पेंग्विन को मार डाला।
जानवरों के व्यवहार को पढ़ने वाले युनिवर्सिटी ऑफ प्रिटोरिया के वैज्ञानिकों ने बताया कि ऐसा ही एक मामला साल 2006 में भी आ चुका है।
एक प्रजाति के जानवर का प्राकृतिक रूप से दूसरे प्रजाति के जानवर के साथ संबंध बनाने वाली बात असमंजस में डालने वाली है। ऐसा क्यों हो रहा, ये पता नहीं चल पाया है।
मिल गया डायनासॉर का सबसे बड़ा जीवाश्म
2014 में अर्जेंटीना में सबसे बड़े डायनासोर ड्रेडनॉटस का जीवाश्म मिला। इससे पहले इतने बड़े डायनासोर का जीवाश्म नहीं खोजा गया था।
वैज्ञानिकों का कहना है कि उन्हें 70 प्रतिशत हड्डी के जीवाश्म मिले हैं जिससे इसके आकार का अनुमान लगाया जा सकता है।
उन्होंने इसका आकार 26 मीटर तक बताया है जो कि दो बसों को एक लाइन से आगे-पीछे लगाने के बाद भी इससे ज़्यादा होगा और इसका वजन करीब 60 टन बताया गया है।
7.7 करोड़ साल पुराने इस जीवाश्म के बारे में विस्तार से साइंटिफिक रिपोर्ट्स जर्नल में छपा है। इस खोज दल का नेतृत्व अमरीका में फिलाडेल्फिया स्थित ड्रेक्सल यूनिवर्सिटी के केनिथ लैकोवारा ने किया।
उन्होंने बताया, "इस डायनासोर का विशाल आकार डरावना है। लेकिन ये जिस परिवेश में था, वहां ऐसा कुछ भी नहीं रहा होगा जिसका ये शिकार कर सकें और अपने बड़े आकार की वजह से यह हमला करने में अक्षम रहे हों।"
गोल्डफिश मछली के ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी
बीबीसी में छपी खबर के मुताबिक में डॉक्टरों ने इस साल ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में गोल्डफिश मछली का ब्रेन सर्जरी किया। ये सर्जरी अपने आप में चौंकाने वाली थी।
जॉर्ज नाम की इस गोल्डफ़िश की मालकिन मेलबर्न में रहती हैं। डॉक्टर ट्रीस्टन रिच ने यह ऑपरेशन किया। उन्होंने मेलबर्न के 3 ए डब्ल्यू रेडियो स्टेशन पर कहा कि वो मछली अब भली चंगी है और तैर रही है।
चिकित्सकों का कहना है कि 10 साल की यह गोल्डफ़िश अभी और 20 साल जी सकती है। डॉक्टर रिच ने कहा, "जॉर्ज के सिर के ऊपरी हिस्से में बड़ा सा ट्यूमर था जो धीरे-धीरे बढ़ रहा था। इससे उसका जीवन प्रभावित हो रहा था।"
उन्होंने बताया कि फिश के गलफड़े में ऑक्सीजनयुक्त पानी लगातार देकर उसे जिंदा रखा गया था। उन्होंने 45 मिनट तक चले इस ऑपरेशन को 'जटिल' बताया।
मरे सांप भी मार सकने के काबिल
आपने हाल ही में आई उस खबर को तो पढ़ा ही होगा जिसमें चीन में एक शेफ का सांप ने तब काट लिया जब वो उसका सिर काट चुका था।
वॉशिंगटन की युनिवर्सिटी ऑफ अरकानकास के प्रोफेसर स्टीवन बॉपुरे ने बताया कि सांप मर जाने के बाद भी काट सकते हैं।
उन्होंने बताया कि मरे हुए सांप की थोड़े बहुत मूवमेंट अगर दिखाई दें या होने लगे तो ये उसके शरीर में मौजूद आयन्स जिसे हम इलेक्रिटकली चार्जड पार्टिकल या कण भी कहते हैं, उसकी वजह से होता है।
उन्होंने कहा कि ये पार्टिकल मरे हुए सांप के नसों की सेल्स में सांप के मरने के कुछ घंटों बाद भी एक्टिव रहते हैं।
जैसे ही उसके साथ कोई छेड़-छाड़ होती है, ये नसें खुल जाती हैं और इनसे आयन्स पास होने लगते हैं।
इससे उनमें एक इंपल्स होता है जो उन्हें मुड़ने या फिर कोई एक्शन लेने की इजाजत देता है।
कुछ इन्हीं एक्शन में शामिल हैं सांपों का मरने के बाद भी काट देने की काबिलियत।
मिली ऐसी मछली जो उड़ भी सकती है
क्या आपको पता है कि हमारी धरती पर एक मछली ऐसी भी है जो उड़ सकती है। जी हां, ये मछली पानी में ही रहती है लेकिन बीच-बीच में पानी के ऊपर तेजी से आती है और फिर पानी के अंदर चली जाती है।
लेकिन जब वो पानी के ऊपर आती हैं, तो कुछ देर के लिए अपनी विंग्स से उड़ती भी हैं। ये समुद्र से दो मीटर की ऊंचाई तक भी उड़ते देखें गए हैं।
इस मछली की प्रजाति का नाम मोब्यूला है। इन्हें फ्लाइंग मोब्यूला या फिर फ्लाइंग रेज नाम से भी जाना जाता है।
इन्हें गल्फ ऑफ कैलिफोर्निया में कई जगह पाया जाता है। यहां ये सबसे ज्यादा गोल्ड कोस्ट जिसे बाजा कोस्ट के नाम से भी जाना जाता हैं, वहां पर भी पाया जाता है।
पहली बार दिखा ऐसा चूहा जिसकी होती है सूंड
कैलिफोर्निया स्थित कैलिफोर्निया अकादमी ऑफ साइंसेज के वैज्ञानिकों ने एक बेहद अलग सी खोज की।
उन लोगों ने अफ्रीका के नामीबिया इलाके से मैक्रोशिलिडस माइकस नाम के एक ऐसे चूहे की प्रजाति को खोज निकाला है जिसके मुंह के आगे छोटी सी सूंड है।
डेली मेल में प्रकाशित खबर के अनुसार जंग के रंग के ये चूहे साइज में भी आम चूहों से जितने ही हैं।
वैज्ञानिकों ने बताया कि ये चूहे सेंगी प्रजाति के चूहों के अंदर आते हैं। इन्हें ही ऐलिफेंट श्रीउ बोला जाता है और पिछले दस सालों में सेंगी प्रजाति में तीसरी बड़ी खोज हैं।
दुनिया की सबसे बड़ी चिड़िया, परों का आकार 24 फुट
वैज्ञानिकों के इस साल हुए खोज ने दुनिया की सबसे बड़ी चिड़िया पैलागोरनिस सेंडेर्सी को बताया है। इस चिड़िया का नाम कॉनडोर भी है जो धरती पर 28 मिलियन साल पहले रहती थी।
कॉनडोर का भी वजन 81.5 किलोग्राम था। उसके पर 24 फुट तक के थे। 24 फुट का मतलब है एक पर का लगभग सात मीटर तक का होना। इस वजह से उसका वजन भी बढ़ता था।
इस चिड़िया पर शोध कर रहे इंग्लेंड के ब्रूस म्यूजियम के क्यूरेटर डॉ डेन सेप्का ने बताया कि कॉनडोर को साउथ कैरोलिना में खुदाई के वक्त पाया गया था।
साल 1983 में जब मजदूरों ने एयरपोर्ट बनाने के लिए सड़क की खुदाई चालू की थी तब उन्हें कॉनडोर का अवशेष मिला था।
जांच के बाद पता चला कि इस चिड़िया जितनी बड़ी चिड़िया अभी तक इतिहास में कोई नहीं मिला है।