ऑनलाइन कैब सेवा का उपयोग करने वाले यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल ड्राइवर पर नहीं, बल्कि सेवा प्रदान करने वाली कंपनी पर भी होती है। यदि यात्रा के दौरान कोई दुर्घटना घटती है तो संबंधित कंपनी की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह यात्री को उचित मुआवजा और सहायता प्रदान करे। हालांकि, कई बार कंपनियां इस जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करती हैं, जिससे उनकी नीयत और यात्री सुरक्षा को लेकर गंभीर संदेह खड़े होते हैं। ऐसी ही एक घटना हाल ही में घटी है, जिसकी आपबीती महिला ने खुद पोस्ट साझा कर बयां की है। आइए जानते हैं कि महिला ने क्या कहा है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट
ऐसी ही एक घटना बेंगलुरु की रहने वाली सुनंदा पाल के साथ घटी है। सुनंदा, जो कि कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी विंग में काम करती हैं। उन्होंने ऐप से एक कैब बुक की थी। सुनंदा का कहना है कि यात्रा के दौरान कैब ड्राइवर गाड़ी को काफी तेज चला रहा था और उसे नींद आ गई, जिसके चलते सामने से जोरदार टक्कर हो गई। इस हादसे में सुनंदा का दाहिना पैर टूट गया, जिससे उन्हें सर्जरी करानी पड़ी। अब तक उनके इलाज, दवाओं और फिजियोथेरेपी पर पांच लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुका है। वह एक महीने से बिस्तर पर हैं और अभी भी रिकवरी प्रक्रिया में हैं।
महिला ने पोस्ट में साझा की आपबीती
हादसे के बाद सुनंदा ने बताया कि न तो कंपनी और न ही ऐप की तरफ से उन्हें कोई मदद दी गई। जब उन्होंने यह पूरी घटना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स X पर साझा की, तो कंपनी ने केवल 1104 हजार रुपये की राशि रिफंड की। वहीं, ऐप से केवल दो लोग अस्पताल में आए, लेकिन उसके बाद उन्होंने कोई संपर्क नहीं किया और न ही कोई सहायता दी। कंपनी पर सुनंदा ने अपनी पोस्ट में दुर्घटना के बाद की तस्वीरें और कंपनी से हुई बातचीत के स्क्रीनशॉट्स भी साझा किए, जिनमें वह लगातार मदद मांग रही हैं। कंपनी की तरफ से जवाब मिला कि उन्होंने अपनी कंपनी की पॉलिसी के तहत ही सहायता दी है।
पोस्ट पर यूजर्स ने दिए ऐसे रिएक्शंस
इस पोस्ट के वायरल होते ही सोशल मीडिया पर लोगों ने इस गैरजिम्मेदाराना रवैये की आलोचना शुरू कर दी। एक यूजर ने लिखा, "यह बेहद शर्मनाक है कि कोई भी जिम्मेदारी नहीं ले रहा," जबकि एक और यूजर ने कहा, "कंपनियों ने जिस तरह से इस स्थिति को हैंडल किया, वह बहुत ही दुखद है।"