Viral Post: दरअसल शाम्भवी शाम को अपने ऑफिस का काम खत्म करने के बाद अपने भाई से मिलने और डिनर पर जाने के लिए रैपिडो ऑटो बुक करती हैं। उनका सफर लगभग दस मिनट का था और वह इंदिरानगर तक गईं।
बेंगलुरु की रहने वाली शाम्भवी श्रीवास्तव का हाल ही में एक ऐसा अनुभव हुआ जिसने उन्हें यह महसूस कराया कि दुनिया में अब भी ईमानदार और नेकदिल लोग मौजूद हैं। उन्होंने इस पूरे वाकये को अपने लिंक्डइन अकाउंट पर शेयर किया, जो अब सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। तो आइए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है।
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सोशल मीडिया पर वायरल हुई यह खबर
दरअसल शाम्भवी शाम को अपने ऑफिस का काम खत्म करने के बाद अपने भाई से मिलने और डिनर पर जाने के लिए रैपिडो ऑटो बुक करती हैं। उनका सफर लगभग दस मिनट का था और वह इंदिरानगर तक गईं। डेस्टिनेशन पर पहुंचकर जब वह उतरीं तो उन्हें जल्दबाजी में ध्यान ही नहीं रहा कि उन्होंने अपने ईयरफोन ऑटो में ही छोड़ दिए हैं। कुछ मिनट बाद जब वह अपने भाई से मिल चुकी थीं, तभी उनके मोबाइल पर एक जीपे नोटिफिकेशन आया। शुरुआत में वह थोड़ी घबरा गईं, उन्हें लगा कि कहीं दोबारा पैसे तो नहीं कट गए। लेकिन जब उन्होंने मैसेज खोला तो देखा कि वह रैपिडो ड्राइवर जहरुल का मैसेज था। उसमें लिखा था कि उनके ईयरफोन उनकी ऑटो में रह गए हैं।
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ऑटो ड्राइवर ने दिखाई इंसानियत
जहरुल ने न सिर्फ ईयरफोन मिलने की जानकारी दी, बल्कि यह भी बताया कि वह उन्हें सुरक्षित रखे हुए हैं और पूछते हैं कि वह उन्हें कब वापस ले सकती हैं। शाम्भवी ने जवाब में कहा कि वह सोमवार को ऑफिस से लौटते वक्त ईयरफोन ले लेंगी, लेकिन फिर वह भूल गईं कि आने वाला सोमवार दिवाली का दिन है। फिर कुछ दिन बाद सुबह करीब साढ़े आठ बजे उन्हें याद आया और उन्होंने जहरुल को फोन करके कहा कि अगर वह कभी उनके ऑफिस के पास आएं तो ईयरफोन दे दें। इसके आधे घंटे बाद जहरुल ने खुद कॉल करके बताया कि वह उनके ऑफिस के पास हैं और वह आकर ईयरफोन ले सकती हैं।
लड़की ने पोस्ट साझा कर की सराहना
शाम्भवी के मुताबिक जहरुल को ऐसा करने की कोई मजबूरी नहीं थी। वह चाहते तो ईयरफोन रख लेते या किसी को बेच देते, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। उन्होंने ईमानदारी दिखाते हुए ईयरफोन वापस करने का फैसला किया। शाम्भवी ने अपनी पोस्ट में लिखा कि यह छोटी-सी घटना उनके लिए बहुत बड़ी सीख बन गई। इससे उन्हें लगा कि भले ही आज के समय में लोग स्वार्थी नजर आते हैं, लेकिन अब भी कुछ लोग हैं जो इंसानियत को सबसे ऊपर रखते हैं।