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Viral Video: 97 की उम्र में प्लेन के पंख पर खड़ी हुईं दादी, स्ट्रोक को हराकर तोड़ दिया अपना ही वर्ल्ड रिकॉर्ड

Thu, 06 Aug 2026 11:57 AM IST
Dhirendra Singh फीचर डेस्क, अमर उजाला

सार

Viral: 97 वर्षीय ब्रिटिश महिला बेट्टी ब्रोमेज ने स्ट्रोक से उबरने के एक साल बाद फिर से विंग वॉकिंग कर इतिहास रच दिया। उन्होंने 97 वर्ष 127 दिन की उम्र में अपना ही गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा और इस साहसिक अभियान के जरिए अस्पताल के लिए फंड भी जुटाया।
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93 साल की उम्र में हासिल की थी उपलब्धि - फोटो : इंस्टाग्राम femalequotient
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विस्तार
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उम्र अक्सर लोगों के कदम धीमे कर देती है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो बढ़ती उम्र को अपनी उड़ान के बीच कभी आने नहीं देते। ब्रिटेन की रहने वाली 97 वर्षीय बेट्टी ब्रोमेज ने एक बार फिर साबित कर दिया कि अगर हौसला मजबूत हो तो उम्र सिर्फ एक संख्या बनकर रह जाती है। स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारी से उबरने के ठीक एक साल बाद उन्होंने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जिसे देखकर हर कोई दंग रह गया। तो आइए जानते हैं।

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सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
चेल्टेनहैम की रहने वाली बेट्टी ब्रोमेज ने साइरेंसस्टर स्थित आरएफसी रेंडकॉम्ब एयरफील्ड में उड़ते विमान के पंख पर खड़े होकर विंग वॉकिंग की। इस साहसिक प्रदर्शन के दौरान उनकी उम्र 97 वर्ष और 127 दिन थी। इसी के साथ उन्होंने सबसे उम्रदराज महिला विंग वॉकर के रूप में अपना ही गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ दिया।




93 साल की उम्र में हासिल की थी उपलब्धि
बेट्टी पहली बार इस रिकॉर्ड की मालिक साल 2022 में बनी थीं। उस समय उन्होंने 93 साल की उम्र में यह उपलब्धि हासिल की थी। दिलचस्प बात यह है कि उनका रोमांच के प्रति जुनून आज का नहीं है। 87 साल की उम्र से अब तक वह कुल छह बार विंग वॉकिंग कर चुकी हैं और हर बार अपने साहस से लोगों को प्रेरित करती रही हैं।
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नहीं कमजोर हुए इरादे
हालांकि पिछले साल अगस्त 2025 में उनकी जिंदगी में एक मुश्किल दौर भी आया। उन्हें गंभीर स्ट्रोक हुआ, जिसके बाद काफी समय तक इलाज चला। आज भी उन्हें बोलने में थोड़ी परेशानी होती है, लेकिन इस चुनौती ने उनके इरादों को कमजोर नहीं किया। चेल्टेनहैम जनरल हॉस्पिटल के स्ट्रोक यूनिट में उनका इलाज हुआ और उन्होंने स्वस्थ होने के बाद उसी अस्पताल के प्रति आभार जताने का अनोखा तरीका चुना।

अस्पताल के लिए जुटाया फंड
बेट्टी ने इस विंग वॉकिंग अभियान के जरिए अस्पताल के लिए फंड जुटाया, ताकि स्ट्रोक से जूझ रहे दूसरे मरीजों को भी बेहतर इलाज मिल सके। उनके इस कदम की हर तरफ सराहना हो रही है। बीबीसी से बातचीत में बेट्टी ने मुस्कुराते हुए कहा कि अगर वह इस तरह के रोमांचक काम न करें तो जिंदगी उन्हें उबाऊ लगने लगेगी। उन्होंने बताया कि अब वह गाड़ी नहीं चला सकतीं, उनकी आंखों की रोशनी पहले जैसी नहीं रही और कई बार परेशान भी हो जाती हैं। ऐसे में वह वही करती हैं, जो अब भी पूरे उत्साह के साथ कर सकती हैं।

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