बिहार के बेगूसराय जिले के बीहट स्थित सिद्धपीठ बड़ी दुर्गा मंदिर अपनी 221 फीट ऊंचाई, मां के पारंपरिक स्वरूप की करीब 90 साल पुरानी मान्यता और दो किलोमीटर लंबी विसर्जन यात्रा के लिए विशेष पहचान रखता है।
बिहार के बेगूसराय जिले के बीहट में स्थित सिद्धपीठ बड़ी दुर्गा मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं, भव्यता और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं के कारण विशिष्ट पहचान रखता है। नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा के बीच इस मंदिर की परंपराएं विशेष आकर्षण का केंद्र हैं। करीब 221 फीट ऊंचाई वाले इस मंदिर में मां के पारंपरिक स्वरूप से लेकर विसर्जन यात्रा तक, हर परंपरा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ी है।
विसर्जन के दौरान आस्था और सामूहिक सहभागिता का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं को जीवंत रखने का माध्यम भी है। स्थानीय लोगों के लिए यह आयोजन सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक एकजुटता से भी जुड़ा हुआ है।
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की आराधना
शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन मां दुर्गा के चंद्रघंटा स्वरूप की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां चंद्रघंटा साहस, शौर्य और निर्भयता की प्रतीक हैं। भक्त उनकी आराधना कर सुख-शांति, समृद्धि और संकटों से रक्षा की कामना करते हैं। इस अवसर पर बिहार के विभिन्न दुर्गा मंदिरों और शक्तिपीठों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। बीहट का बड़ी दुर्गा मंदिर भी अपनी विशिष्ट परंपराओं और धार्मिक महत्ता के कारण श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण स्थान रखता है।