राज्यसभा उपचुनाव को लेकर राजद और जदयू ने मंगलवार को अपने-अपने विधायक दल की बैठक की। एक ओर जहां राजद की बैठक में जदयू को समर्थन देने को लेकर कोई फैसला नहीं हो सका, वहीं जदयू में करीब दो दर्जन विधायकों की अनुपस्थिति से केंद्रीय नेतृत्व चिंतित दिखा। वैसे बैठक में मौजूद 95 विधायकों ने पार्टी उम्मीदवार की जीत का संकल्प लिया गया।
मंगलवार शाम हुई जदयू विधायक दल की बैठक में करीब 24 विधायक शामिल नहीं हुए। विधायकों की अनुपस्थिति पर पार्टी अध्यक्ष शरद यादव ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कुछ विधायक बैठक में नहीं पहुंचे। यह गंभीर मामला है और पार्टी इसे सुलझाने में लगी है। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा उपचुनाव में जदयू के आधिकारिक उम्मीदवार की जीत होगी।
राजद के समर्थन पर भी यादव ने कहा कि जदयू को राजद का समर्थन हासिल होगा। उधर, राजद विधानमंडल की बैठक बेनतीजा खत्म हो गई। बुधवार तीन बजे एक बार फिर बैठक की जाएगी। सूत्रों के अनुसार बैठक में राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद जदयू समर्थन देने को लेकर सकारात्मक दिखे और उन्होंने इसे समय की मांग बताया।
लालू की इस राय से उलट अधिकतर विधायकों ने इसे पार्टी के लिए घातक करार दिया। विधानसभा में विधायक दल के नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी जैसे नेताओं का मानना था कि जदयू को समर्थन देने से राजद विधानसभा चुनाव में रेस से दूर हो जाएगा और मुकाबला जदयू और भाजपा के बीच चला जाएगा। कुछ विधायकों का यह भी कहना था कि मांझी सरकार को समर्थन देने के बाद राजद का जनाधार प्रभावित हुआ है।
व्हिप पर चुनाव आयोग की रोक
चुनाव आयोग ने तत्काल प्रभाव से राज्यसभा उपचुनाव में जारी हुए व्हिप पर रोक लगा दी है। चुनाव आयोग ने यह कार्रवाई निर्दलीय प्रत्याशी साबिर अली की लिखित शिकायत पर की है। चुनाव आयोग ने व्हिप को गैरकानूनी करार दिया है।
इस संबंध में 2007 में जारी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति भी विधानसभा सचिव को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी है। इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रपति के चुनाव या राज्यसभा चुनाव में कोई राजनीतिक दल व्हिप जारी नहीं कर सकता। ऐसा करना आईपीसी की धारा 171सी का उल्लंघन होगा। बहरहाल चुनाव आयोग ने इस पूरे मामले से दिल्ली स्थित मुख्यालय को भी अवगत करा दिया है।