बिहार की राजधानी पटना में प्रदर्शन कर रहे भाजपा कार्यकर्ताओं पर 13 जुलाई को पटना पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। लाठीचार्ज के दौरान भाजपा सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल सहित दर्जनों कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हुए थे।
अब तक इन अधिकारियों को बुलाया गया
लोकसभा की विशेषाधिकार समिति ने पटना के सात अधिकारियों को तलब किया है। इन अधिकारियों को समिति के सामने प्रस्तुत होना है और लाठीचार्ज मामले पर समिति को जवाब देना है। तलब किए जाने वालों में बिहार के डीजीपी आरएस भट्टी के अलावे पटना के डीएम डॉ. चंद्रशेखर सिंह, पटना एसएसपी राजीव मिश्रा, वैभव शर्मा, पटना एएसपी काम्या मिश्रा, पटना पुलिस उपाधीक्षक और अनुमंडल पदाधिकारी खांडेकर श्रीकांत कुंडलिक शामिल हैं।
क्या था मामला
नई शिक्षक नियमावली के विरोध और उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को चार्जशीट के आधार पर सरकार से हटाने जैसे कई मुद्दों पर 13 जुलाई को पटना में भारतीय जनता पार्टी के विधानसभा पैदल मार्च के दौरान पटना पुलिस ने जमकर लाठीचार्ज किया था। घटना के बाद इसकी जांच के लिए सुनीता दुग्गल, विष्णु दयाल राम, पूर्व मुख्यमंत्री रघुबर दास और सांसद मनोज तिवारी की चार सदस्यीय केंद्रीय जांच टीम पटना आई थी। टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। साथ ही आसपास के लोगों से भी पूछताछ कर रिपोर्ट भेज दिया। इस रिपोर्ट में यह बताया गया कि पुलिस मैनुअल को दरकिनार कर भाजपा नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ जानबूझ कर लाठीचार्ज किया गया। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि को पुलिस ने जानबूझ कर कमर के ऊपर और खासकर सिर, गर्दन पर लाठियां बरसाई। सांसद जनार्दन सिंह सिग्रीवाल समेत ज्यादा चोटिल लोगों के नाम के साथ उनकी हालत की जानकारी देते हुए उनकी आंखोंदेखी बातों के आधार पर जांच रिपोर्ट में यह भी लिखा गया है कि पुलिस पहले ही यह मंशा बना ली थी कि भाजपा के इस शांतिपूर्ण मार्च के दौरान नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों को उन्हें घेरकर पीटना है।