इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की चमक-धमक के बीच अब बिहार के एक होनहार युवा क्रिकेटर की प्रतिभा पूरे देश के सामने आने को तैयार है। पंकज तिवारी की यह उपलब्धि न केवल सारण, बल्कि पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय बनी हुई है। सतजोड़ा गांव निवासी मधुसूदन तिवारी के पुत्र पंकज तिवारी ने इंडियन प्रीमियर लीग की चर्चित टीम रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर में नेट बॉलर के रूप में
पंकज ने चयनकर्ताओं को किया प्रभावित
पंकज तिवारी ने अपनी तेज रफ्तार गेंदबाजी से चयनकर्ताओं को प्रभावित किया है। लगभग 138 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से गेंदबाजी कर उन्होंने अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। इस टीम में भारतीय क्रिकेट के दिग्गज बल्लेबाज विराट कोहली जैसे खिलाड़ी भी शामिल हैं, जिससे पंकज को सीखने और खुद को निखारने का बड़ा अवसर मिलने वाला है। पंकज की कहानी संघर्ष और जुनून की मिसाल है। महज 8 वर्ष की उम्र में उन्हें क्रिकेट का शौक लगा। गांव के उबड़-खाबड़ खेतों में साधारण बल्ले और गेंद से खेलते-खेलते उन्होंने अपने सपनों को आकार दिया। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा निखरती गई और उन्होंने सारण जिला क्रिकेट एकेडमी, दहियावां में खेल की बारीकियां सीखीं। इसके बाद पटना स्थित सरकार पटेल क्रिकेट एकेडमी में पांच वर्षों तक प्रशिक्षण लेकर अपने खेल को और मजबूत किया।
दरोगा के पद से रिटायर हो चुके हैं पिता
वर्तमान में पंकज पटना में सिवान जिले के निवासी सह कोच शशि नंदन के मार्गदर्शन में अभ्यास कर रहे हैं। उनकी मेहनत और अनुशासन ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है। हालांकि इस सफर में चुनौतियां भी कम नहीं थीं। क्रिकेट के प्रति दीवानगी इतनी थी कि उन्होंने एक समय 10वीं की परीक्षा तक छोड़ दी थी। बाद में परिवार के समझाने पर उन्होंने पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना सीखा। सबसे अहम बात यह है कि पंकज एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता मधुसूदन तिवारी बिहार पुलिस में दारोगा के पद से सेवानिवृत्त हैं, जबकि माता शारदा देवी गृहिणी हैं। उनके छोटे भाई भारतीय नौसेना में कार्यरत हैं।