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Bihar: JDU विधायक पप्पू पांडेय की मुश्किलें बढ़ीं, वारंट जारी होने के बाद पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी

Mon, 13 Apr 2026 09:52 AM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गोपालगंज

सार

गोपालगंज में कुचायकोट से JDU विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय, उनके भाई और एक CA के खिलाफ कोर्ट द्वारा गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया है। मामला भू-माफिया को संरक्षण देने और जमीन विवादों से जुड़ा है।
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JDU विधायक पप्पू पांडेय - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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बिहार के गोपालगंज जिले से बड़ी खबर सामने आई है। कुचायकोट से जदयू विधायक अमरेंद्र कुमार पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय, उनके बड़े भाई सतीश पांडेय और उनके करीबी चार्टर्ड अकाउंटेंट राहुल तिवारी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। न्यायालय द्वारा इन तीनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाने के बाद जिला पुलिस पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है।
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सुबह-सुबह पुलिस की बड़ी कार्रवाई
सोमवार की अहले सुबह पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी के निर्देश पर भारी संख्या में पुलिस बल ने विधायक के अलग-अलग ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। पुलिस टीमों ने हथुआ थाना क्षेत्र के तुलसिया गांव स्थित पैतृक आवास, हथुआ स्थित निजी आवास और पेट्रोल पंप पर सघन तलाशी ली। इस कार्रवाई से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। हालांकि घंटों चली छापेमारी के बावजूद पुलिस को कोई भी आरोपी हाथ नहीं लगा। बताया जा रहा है कि वारंट की जानकारी मिलते ही सभी आरोपी फरार हो गए।

क्या है पूरा मामला
यह पूरा मामला भू-माफियाओं को संरक्षण देने और जमीन से जुड़े विवादों में संलिप्तता के गंभीर आरोपों से जुड़ा है। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विधायक, उनके भाई और सीए के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। पुलिस का आरोप है कि इनके संरक्षण में भू-माफिया सक्रिय थे, जो अवैध जमीन कब्जा और अन्य आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दे रहे थे।
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अब तक की पुलिस कार्रवाई
पुलिस इस मामले में पहले से ही सक्रिय है। जांच के दौरान मिले पुख्ता सबूतों के आधार पर चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। इन आरोपियों से पूछताछ और दस्तावेजों के आधार पर ही विधायक और उनके सहयोगियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई, जिसके बाद कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट जारी कराया गया। फिलहाल पुलिस की कई टीमें जिले के बाहर भी आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही हैं। इस कार्रवाई के बाद जिले की सियासत में भी हलचल तेज हो गई है, क्योंकि सत्ताधारी दल के विधायक पर इस तरह की बड़ी कार्रवाई हाल के वर्षों में कम ही देखने को मिली है।
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