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Bihar : मनरेगा में बड़ा फर्जीवाड़ा! चार योजनाओं में मिलीं गंभीर अनियमितताएं; अधिकारियों पर लगा जुर्माना

Sat, 11 Jul 2026 07:29 AM IST
सारण ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सारण

सार

सारण जिले में मनरेगा योजनाओं की संयुक्त जांच में फर्जी एनएमएमएस हाजिरी, कार्यस्थल पर गड़बड़ी और भुगतान में अनियमितता उजागर हुई। जिला प्रशासन ने 3.21 लाख की रिकवरी, एफआईआर, जुर्माना और दो मेट का निबंधन रद्द करने का आदेश दिया है। कार्रवाई के बाद मनरेगा योजनाओं की निगरानी पर सवाल और सख्ती दोनों बढ़ गई हैं।
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सारण समाहरणालय - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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सारण जिले में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन में गंभीर अनियमितताओं का मामला सामने आया है। केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास मंत्रालय (MoRD) और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) की संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्राथमिकी दर्ज कराने, 3.21 लाख रुपये की रिकवरी, संबंधित अधिकारियों एवं कर्मियों पर जुर्माना लगाने और दो मेट का निबंधन रद्द करने का आदेश दिया है।
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जिला प्रशासन के अनुसार, ग्रामीण विकास मंत्रालय के निर्देश पर 13 जून 2026 को MoRD और NIC की संयुक्त टीम ने सारण जिले के सदर प्रखंड की मौना और लोहड़ी पंचायत तथा सोनपुर प्रखंड की नयागांव पंचायत में संचालित मनरेगा योजनाओं का औचक निरीक्षण किया। टीम ने कार्यस्थलों पर मौजूद मजदूरों से कराए गए कार्य और नेशनल मोबाइल मॉनिटरिंग सिस्टम (NMMS) में दर्ज ऑनलाइन उपस्थिति का मिलान किया। जांच में कई स्थानों पर डिजिटल रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में बड़ा अंतर मिला। इसके बाद डीआरडीए (DRDA) और मनरेगा के तकनीकी अधिकारियों ने विस्तृत जांच की गई, जिसके आधार पर कार्रवाई की गई।

जमुना गांव की योजना में भुगतान के मुकाबले नहीं मिला काम
सबसे गंभीर अनियमितता सदर प्रखंड की मौना पंचायत के ग्राम जमुना स्थित बदरी राय के खेत से फटा पीपल तक पईन सफाई योजना में सामने आई। करीब 4.88 लाख रुपये की इस योजना में 3.21 लाख रुपये का भुगतान किया जा चुका था, लेकिन जांच में भुगतान के अनुरूप कार्य नहीं मिला। निरीक्षण के दौरान कार्यस्थल पर 22 मजदूर मौजूद थे, जबकि उनकी उपस्थिति एनएमएमएस ऐप पर दर्ज नहीं थी। जांच टीम ने आशंका जताई कि निरीक्षण की सूचना मिलने के बाद मजदूरों को जल्दबाजी में बुलाया गया।
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इस मामले में कार्यक्रम पदाधिकारी, संबंधित मुखिया, पंचायत तकनीकी सहायक सत्येंद्र यादव, कनीय अभियंता सुहैल अख्तर नोमानी और पंचायत रोजगार सेवक अंजय कुमार से संयुक्त रूप से 3,21,703 रुपये की रिकवरी का आदेश दिया गया है। साथ ही पंचायत तकनीकी सहायक, पंचायत रोजगार सेवक और संबंधित मेट के खिलाफ फर्जी एनएमएमएस उपस्थिति दर्ज करने तथा सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराने का निर्देश दिया गया। इस संबंध में मुफस्सिल थाना में कांड संख्या 495/26 दर्ज हो चुका है।

दूसरी योजना में बिना काम के मजदूर मिले, लगा जुर्माना
मौना पंचायत की लालू सिंह के खेत से बबलू प्रसाद के खेत तक पईन सफाई योजना में भी गड़बड़ी मिली। योजना को दो जून 2026 से संचालित दिखाया गया था, लेकिन मौके पर कोई कार्य नहीं मिला। हालांकि इस योजना में अभी भुगतान नहीं हुआ था। निरीक्षण के दौरान 25 मजदूर मौजूद मिले, लेकिन उनकी उपस्थिति भी एनएमएमएस पर दर्ज नहीं थी। इस मामले में कार्यक्रम पदाधिकारी, मुखिया, पंचायत तकनीकी सहायक, कनीय अभियंता और पंचायत रोजगार सेवक पर मनरेगा अधिनियम की धारा-25 के तहत एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया।

लोहड़ी पंचायत में भी सामने आई लापरवाही
सदर प्रखंड की लोहड़ी पंचायत में उदय सिंह के खेत से विनोद कुमार के खेत तक पईन सफाई योजना की जांच में भी कार्य शुरू दिखाया गया, जबकि मौके पर काम नहीं मिला। यहां भी 25 मजदूर कार्यस्थल पर मौजूद थे, लेकिन उनकी डिजिटल उपस्थिति दर्ज नहीं थी। इस मामले में कार्यक्रम पदाधिकारी, मुखिया, पंचायत तकनीकी सहायक, कनीय अभियंता, पंचायत रोजगार सेवक और संबंधित मेट पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। साथ ही मेट का निबंधन रद्द करने का आदेश दिया गया।

सोनपुर में मजदूर नहीं मिले, स्पष्टीकरण खारिज
सोनपुर प्रखंड की नयागांव पंचायत में द साई ग्रीन से मठ चिलावा सीवान तक पईन उड़ाही योजना की जांच में निरीक्षण के दौरान कार्यस्थल पर एक भी मजदूर मौजूद नहीं मिला। उस दिन का एनएमएमएस रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं था। पंचायत रोजगार सेवक ने सफाई दी कि सुबह 5:30 बजे उपस्थिति दर्ज कर ली गई थी, लेकिन बाद में पानी भर जाने के कारण कार्य शुरू नहीं हो सका। जांच टीम ने इस स्पष्टीकरण को अस्वीकार्य मानते हुए कार्यक्रम पदाधिकारी रीना कुमारी, संबंधित मुखिया, पंचायत तकनीकी सहायक कन्हैया लाल शर्मा, कनीय अभियंता शुभ्रमणि, पंचायत रोजगार सेवक शिवशरण दास और मेट सतीश कुमार पर एक-एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया। संबंधित मेट का निबंधन भी समाप्त करने का आदेश दिया गया।

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डिजिटल निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
जांच रिपोर्ट से स्पष्ट हुआ कि मजदूरों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए लागू की गई एनएमएमएस प्रणाली का कई स्थानों पर पालन नहीं किया गया। कहीं मजदूरों की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं मिली, तो कहीं कार्यस्थल पर कार्य ही नहीं मिला। एक योजना में भुगतान के अनुरूप कार्य नहीं मिलने से सरकारी राशि के दुरुपयोग की भी पुष्टि हुई है। जिला प्रशासन का कहना है कि मनरेगा योजनाओं में अनियमितता बरतने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

 

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