पुलिस थाने में बैठे नजर आ रहे माले नेता जितेंद्र पासवान
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मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गोपालगंज जिले में आगमन से कुछ घंटे पहले भाकपा (माले) नेता और भोरे विधानसभा के पूर्व प्रत्याशी जितेंद्र पासवान की गिरफ्तारी ने राजनीतिक माहौल गरमा दिया है। इस घटना पर माले नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है, इसे सरकार द्वारा विपक्ष को डराने और दमन करने का कदम बताया है।
विपक्ष को कुचलने की कोशिश का आरोप
माले के जिला सचिव इंद्रजीत चौरसिया ने नीतीश कुमार की सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह सरकार निहत्थे लोगों से भी डरती है। उन्होंने कहा कि चाहे यह बिहार की नीतीश सरकार हो या केंद्र की मोदी सरकार, दोनों फासीवादी सोच के तहत जनता की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही हैं। चौरसिया ने आरोप लगाया कि जितेंद्र पासवान की गिरफ्तारी इस बात का प्रमाण है कि सरकार विपक्ष के नेताओं की बढ़ती लोकप्रियता से घबरा गई है।
पुलिस ने गिरफ्तारी से किया इनकार
दूसरी ओर, विजयीपुर थाना अध्यक्ष सूरज कुमार ने माले नेता जितेंद्र पासवान की गिरफ्तारी के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि मेरे द्वारा कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है। हालांकि, माले द्वारा जारी तस्वीर में जितेंद्र पासवान थाने में बैठे हुए नजर आ रहे हैं, जिससे प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
सीएम नीतीश कुमार का गोपालगंज दौरा
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार को गोपालगंज जिले के कटेया प्रखंड के बैरिया पंचायत पहुंचे थे, जहां उन्होंने सुधा डेयरी प्लांट का शिलान्यास और भूमिपूजन किया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। लेकिन माले नेताओं द्वारा पासवान की गिरफ्तारी की तस्वीर जारी करने से सीएम के दौरे के दौरान राजनीतिक माहौल तनावपूर्ण हो गया।
विपक्ष के दावे और सरकार पर सवाल
माले ने इस घटना को विपक्ष की आवाज को दबाने का संगीन प्रयास बताया है। माले नेताओं ने यह भी कहा कि सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले नेताओं को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। इंद्रजीत चौरसिया ने चेतावनी दी कि उनकी पार्टी सरकार के ऐसे कदमों से डरने वाली नहीं है और जनता के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा।