बिहार के सारण जिले के मढ़ौरा स्थित गढ़देवी माता मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। नीम के पेड़ में विराजमान मां के दर्शन के लिए दूर-दराज से भक्त पहुंचते हैं। मंदिर प्राचीन मान्यताओं, धार्मिक कथाओं और लोकपरंपराओं से जुड़ा है।
बिहार के सारण जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर स्थित मढ़ौरा की पहचान कभी चीनी मिलों और औद्योगिक गतिविधियों से हुआ करती थी। आज भले ही यहां की पुरानी मिलों की चिमनियां खामोश हैं, लेकिन इस ऐतिहासिक नगर की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान अब भी कायम है। इसी पहचान का प्रमुख केंद्र है गढ़देवी माता का मंदिर। यहां नीम के पेड़ में विराजमान मां के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। दूर-दराज से भक्त यहां दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए माता के दरबार में मत्था टेकते हैं।
स्थानीय लोककथा के अनुसार, मढ़ौरा के इस स्थान पर माता सती के पवित्र रक्त की कुछ बूंदें गिरी थीं। इसी विश्वास के कारण इस स्थल के प्रति श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है। यह मान्यता स्थानीय धार्मिक परंपरा और लोकविश्वास का हिस्सा है।
चीनी मिल की स्थापना से भी जुड़ी है लोककथा
मढ़ौरा कभी औद्योगिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रहा है। स्थानीय इतिहास के अनुसार, वर्ष 1904 में यहां चीनी मिल की स्थापना हुई थी। इसके अलावा मोर्टन उत्पादों और शराब से जुड़ी औद्योगिक इकाइयां भी यहां संचालित होती थीं। वर्तमान में इन पुरानी मिलों की गतिविधियां बंद हो चुकी हैं।
चीनी मिल के निर्माण को लेकर भी एक लोककथा प्रचलित है। कहा जाता है कि निर्माण के दौरान माता की उपेक्षा के कारण बार-बार बाधाएं आ रही थीं। इसके बाद लोगों ने कई दिनों तक माता की पूजा-अर्चना की, जिसके बाद निर्माण कार्य आगे बढ़ सका। यह कथा आज भी स्थानीय जनश्रुति का हिस्सा है।