बिहार के छपरा में महावीर पूजा सेवा समिति ने करीब 20 हजार किताबों से अनोखा पूजा पंडाल तैयार किया है। गुरुकुल से एआई तक की झलक दिखाता यह पंडाल शिक्षा, पढ़ने की संस्कृति और मोबाइल के संतुलित इस्तेमाल का संदेश देता है।
किताबों से बढ़ती दूरी और मोबाइल की बढ़ती लत के बीच बिहार के छपरा में एक अनोखा पूजा पंडाल लोगों को शिक्षा और वास्तविक जीवन का महत्व समझा रहा है। शहर के इंदिरा नगर स्थित महावीर पूजा सेवा समिति ने करीब 20 हजार पुस्तकों से पंडाल तैयार किया है। यह पहल अपनी रचनात्मकता के साथ बच्चों और युवाओं को किताबों से जुड़ने का संदेश भी दे रही है। पंडाल में धार्मिक आस्था के साथ शिक्षा, तकनीक और सामाजिक जागरूकता को भी प्रमुखता दी गई है।
यह परिकल्पना बताती है कि तकनीक कितनी भी विकसित क्यों न हो जाए, ज्ञान हासिल करने, विचारों को समझने और व्यक्तित्व निर्माण में शिक्षा की भूमिका हमेशा अहम रहेगी। किताबें केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे सोचने-समझने की क्षमता विकसित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
मोबाइल की लत छोड़ो, आज संभलोगे तो कल संवर जाएगा
पंडाल का सबसे प्रभावशाली संदेश मोबाइल की बढ़ती लत को लेकर है। मोबाइल और सोशल मीडिया पर जरूरत से ज्यादा समय बिताने की आदत बच्चों और युवाओं की पढ़ाई, नींद, दिनचर्या और पारिवारिक संवाद को प्रभावित कर सकती है। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए समिति ने मोबाइल के दुरुपयोग से होने वाले नुकसान को अलग-अलग कलात्मक माध्यमों से सामने रखा है।
ध्यान भटकने, समय की बर्बादी, तनाव, नींद में परेशानी और अपनों से बढ़ती दूरी जैसे मुद्दों के जरिए लोगों को अपनी आदतों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। पंडाल का संदेश है कि समय रहते अपनी आदतों में सुधार कर लिया जाए, तो भविष्य को बेहतर बनाया जा सकता है।