जम्मू-कश्मीर के बांदीपुरा सेक्टर में 30 अगस्त को आतंकियों से हुई मुठभेड़ में शहीद हुए सारण जिले के जवान छोटू शर्मा का पार्थिव शरीर मंगलवार को दरियापुर थाना क्षेत्र के बेला गांव स्थित शर्मा टोला पहुंचा। जैसे ही फूलों से सजे सेना के वाहन से पार्थिव शरीर गांव की सीमा पर पहुंचा, हजारों की संख्या में मौजूद ग्रामीणों की आंखें नम हो उठीं। लोग हाथों में तिरंगा लिए 'वंदे मातरम्', 'भारत माता की जय' और 'वीर जवान छोटू शर्मा अमर रहें' के नारे लगा रहे थे। पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया।
शहीद के अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ में बूढ़ी मां बेटे को देखने के लिए दौड़ पड़ी, वहीं बहन रो-रोकर बेसुध हो रही थी। इसी बीच शहीद की पत्नी सुष्मिता अपने पति के पार्थिव शरीर से लिपटकर बिलख पड़ीं। वह रोते-रोते बार-बार कह रही थीं, मुझसे क्या गलती हो गई… इतनी जल्दी मुझे अनाथ बनाकर क्यों चले गए? यह मार्मिक दृश्य देखकर मौजूद हर व्यक्ति की आंखें भर आईं।
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छोटू शर्मा की शादी इसी वर्ष 5 मई को सुष्मिता से हुई थी। लेकिन शादी के मात्र पांच दिन बाद यानी 11 मई को ही वह ऑपरेशन सिंदूर के लिए ड्यूटी पर रवाना हो गए थे। परिजन और पत्नी आगामी 7 सितंबर को उनकी छुट्टी पर घर वापसी का इंतजार कर रहे थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। शहीद का पार्थिव शरीर ही तिरंगे में लिपटकर घर लौटा।
परिजनों ने बताया कि शनिवार को छोटू शर्मा ने फोन पर पत्नी और मां से बात की थी। उन्होंने कहा था कि जल्दी घर आ रहा हूं। लेकिन रविवार को मुठभेड़ के दौरान सिर में गोली लगने से उनकी शहादत हो गई। छोटू शर्मा राष्ट्रीय राइफल्स की 24वीं बटालियन में सिपाही के पद पर तैनात थे। उनकी शहादत की खबर मिलते ही पूरा गांव शोक में डूब गया। ग्रामीणों ने उन्हें नम आंखों से श्रद्धांजलि दी और अंतिम यात्रा में हजारों लोग शामिल हुए।