प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस नेताओं ने मिंता देवी को फर्जी वोटर बताते हुए किया दिल्ली में प्रदर्शन।
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सीवान के सिसवां कला में मिंता देवी के घर अमर उजाला की टीम।
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मायके में सही जन्मतिथि से वोटर थी, ससुराल में गलत बना
मामला बिहार के सीवान का था। 'अमर उजाला' की टीम ने मौके पर जाकर पड़ता की कि 124 वर्ष की महिला जीवित है या नहीं? वोटर लिस्ट फर्जी है या नहीं? मतदाता सूची के हिसाब से बूथ का पता लगाकर उस वोटर तक पहुंचने का प्रयास किया गया। सबसे पहले उनके ससुर से मुलाकात हुई। वह खुद ही अधेड़ हैं। जाहिर तौर पर उनकी बहू तो कम उम्र होंगी ही। वोटर कार्ड निकाला। मिंता देवी से मुलाकात कराई। पुराने वोटर कार्ड में 1990 की जन्मतिथि थी। वह मायके, छपरा का था। आधार कार्ड में 1990 ही है। ऐसे में 'अमर उजाला' ने समझने का प्रयास किया कि गलती हुई कहां है? क्या विशेष गहन पुनरीक्षण में? तो जवाब मिला ससुराल में जब मतदाता का ट्रांसफर कराया गया तो जब वोटर कार्ड बना, उसमें मिंता देवी की जन्मतिथि 1900 है। इस हिसाब से वह 2024 में 124 साल की दिखाई जा रही होंगी और निश्चित तौर पर लोकसभा चुनाव के समय भी यही उम्र मतदाता सूची में थी।
पुनरीक्षण से पहले का वोटर कार्ड, बीएलओ ने जांच ही नहीं की
अब पुनरीक्षण में सुधार क्यों नहीं हुआ? इस सवाल का जवाब भी मिला। दरअसल, 'अमर उजाला' ने विशेष गहन पुनरीक्षण के समय स
बसे पहले यह खुलासा किया था कि बीएलओ बगैर निरीक्षण किए ही फॉर्म खुद साइन कर रहे हैं। इस केस में भी यही हुआ था। ससुर से बातचीत में बताया कि हमारे यहां कोई फॉर्म भरने नहीं आया था। एक जगह गांव में बीएलओ कहीं बैठ गया था और पुराने कागज पर ही जो मर्जी, भरता चला गया।
(इनपुट-
इमरोज अहमद, सीवान)