सीवान जिले के गुठनी थाना क्षेत्र के बभनौली गांव में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। आरोप है कि मैरवा के एक निजी नर्सिंग होम ने पांच हजार रुपये बकाया होने के कारण मरीज को डिस्चार्ज करने से इनकार कर दिया। इसी रकम का इंतजाम करने निकले दो नाबालिग भाई सड़क हादसे का शिकार हो गए, जिसमें एक बच्चे की मौत हो गई जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल है।
नर्सिंग होम पर गंभीर आरोप
घटना मैरवा स्थित लक्ष्मीना नर्सिंग होम से जुड़ी बताई जा रही है। मृतक के चाचा रामकिशुन राम ने आरोप लगाया कि उनकी बेटी का इलाज नर्सिंग होम में चल रहा था। इलाज पूरा होने के बाद शनिवार को उसे घर ले जाने की तैयारी थी, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने पांच हजार रुपये बकाया बताते हुए डिस्चार्ज देने से मना कर दिया। उन्होंने बताया कि परिवार ने आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए बाद में पैसे जमा करने की बात कही, लेकिन अस्पताल प्रबंधन ने उनकी बात नहीं मानी।
पैसा लाने निकले थे दोनों बच्चे
परिजनों के अनुसार मजबूरी में परिवार के दो नाबालिग बच्चों को बाइक से गुठनी थाना क्षेत्र के भगवानपुर गांव पैसा लाने भेजा गया। लेकिन रास्ते में बभनौली गांव के पास उनकी बाइक को एक तेज रफ्तार और अनियंत्रित ट्रक ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन लेकर मौके से फरार हो गया।
एक बच्चे की मौत, दूसरा गंभीर
स्थानीय लोगों की मदद से दोनों बच्चों को तुरंत मैरवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। वहां से हालत गंभीर होने पर उन्हें सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया। सदर अस्पताल में डॉक्टरों ने 12 वर्षीय प्रिंस कुमार को मृत घोषित कर दिया। वहीं उसका चचेरा भाई 12 वर्षीय मुन्ना कुमार गंभीर रूप से घायल है, जिसे प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर कर दिया गया।
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
एक तरफ अस्पताल में भर्ती बहन अपने घर लौटने का इंतजार कर रही थी, तो दूसरी तरफ उसका भाई हमेशा के लिए दुनिया छोड़ गया। इस घटना के बाद परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है। परिजन सवाल उठा रहे हैं कि अगर अस्पताल प्रबंधन मानवीय संवेदना दिखाते हुए मरीज को डिस्चार्ज कर देता, तो शायद बच्चों को पैसे लाने नहीं जाना पड़ता और यह हादसा टल सकता था।
पुलिस ने शुरू की जांच
सदर-2 एसडीपीओ गौरी कुमारी ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम को मौके पर भेजा गया था। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। उन्होंने बताया कि परिजनों के आवेदन के आधार पर अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जा रही है। साथ ही नर्सिंग होम पर लगाए गए आरोपों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठने लगी है।
नर्सिंग होम की भूमिका पर उठे सवाल
घटना के बाद स्थानीय लोगों और परिजनों ने नर्सिंग होम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का कहना है कि मानवीय संवेदनाओं को नजरअंदाज कर केवल बकाया राशि के लिए मरीज को रोके रखना बेहद गंभीर मामला है। अब सभी की नजर प्रशासनिक जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हुई है।