गोपालगंज जिले के भोरे थाना क्षेत्र के जानकी नगर गांव में 16 वर्षीय छात्रा शिल्पी यादव की संदिग्ध मौत के बाद इलाके में तनाव और आक्रोश का माहौल है। एक तरफ जहां पुलिस इसे आत्महत्या बता रही है, वहीं दूसरी ओर परिजन और सामाजिक संगठनों का कहना है कि छात्रा की निर्मम हत्या को आत्महत्या का नाम देकर मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है।
सोमवार को ऐपवा, भाकपा-माले, इनौस और मृतका के परिजनों ने मिलकर एक प्रतिवाद मार्च निकाला। मार्च में शामिल लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और शिल्पी को न्याय दिलाने की मांग की। मृतका की मां का कहना है कि उनकी बेटी की नृशंस हत्या कर दी गई। उन्होंने बताया कि शिल्पी का चेहरा तेजाब से जलाया गया, दांत तोड़ दिए गए और उसके शव को पोखर में फेंक दिया गया। बावजूद इसके, पुलिस इसे आत्महत्या बता रही है, जो बेहद दुखद और अपमानजनक है।
प्रदर्शन में शामिल ऐपवा की जिलाध्यक्ष सीता पाल ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह अपराधियों को बचाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं लगातार हो रही हैं और बेटियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐपवा की उपाध्यक्ष रामावती सिंह ने कहा कि बरौली, राजापट्टी और अब भोरे की घटनाएं बता रही हैं कि महिला सशक्तिकरण केवल दिखावा बनकर रह गया है। भाकपा-माले के नेता सुभाष पटेल, इनौस के राज्य अध्यक्ष जितेंद्र पासवान और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी इस घटना पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि यदि दोषियों को कड़ी सजा नहीं मिली तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। इन नेताओं ने मांग की कि मामले की त्वरित सुनवाई हो, परिजनों को मुआवजा मिले और उन्हें सुरक्षा व कानूनी सहायता दी जाए।
इस मामले में पुलिस ने अब तक तीन नामजद आरोपियों मंटू कुमार, अमित और बिट्टू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिस के अनुसार, मंटू ने स्वीकार किया है कि वे तीनों शिल्पी को नहर के पास से अपने साथ ले गए थे, हालांकि उसका दावा है कि कुछ घंटे बाद उसे छोड़ दिया गया था। पुलिस इस बयान की जांच कर रही है और मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल और चैट हिस्ट्री के आधार पर आगे की पड़ताल की जा रही है।
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इधर, गोपालगंज के एसपी अवधेश दीक्षित ने रविवार को घटनास्थल का दौरा करने के बाद बयान दिया कि यह मामला आत्महत्या का लग रहा है। उनके अनुसार, शिल्पी 23 मई की रात अपने प्रेमी और उसके दोस्तों से मिलने गई थी। वहां से लौटने के बाद वह डरी हुई थी और उसे लग रहा था कि परिवार उसे मार डालेगा। इसी डर से उसने आत्महत्या कर ली। एसपी ने बताया कि अब तक की जांच में पुलिस को कॉल रिकॉर्ड, चैट और दोस्तों के बयान मिले हैं जो इस थ्योरी को मजबूती देते हैं। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जब तक पोस्टमार्टम और एफएसएल की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक गैंगरेप और तेजाब हमले जैसे आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
फिलहाल पुलिस को पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की रिपोर्ट का इंतजार है, जिसके बाद ही यह तय हो सकेगा कि मौत की असली वजह क्या थी, कोई यौन शोषण हुआ या नहीं और तेजाब फेंकने की बात कितनी सच है। विरोध कर रहे संगठनों और परिजनों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द न्याय नहीं मिला, तो यह आंदोलन जिले की सीमा पार कर राज्यव्यापी रूप ले सकता है। वे चाहते हैं कि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिले और प्रशासन मामले को गंभीरता से ले।