तेजस्वी ने सिलसिलेवार ट्वीट कर कहा, 'बिहार सरकार ने असमर्थता जताते हुए कहा है कि बाहर फंसे मजदूरों को वापस लाने के लिए सरकार के पास बसें नहीं है। हम सरकार को 2000 बसें सुपुर्द करने के लिए तैयार है। वो नोडल और प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में इन बसों का प्रयोग कर सकते है। बसें पटना में कब भेजनी है। बताया जाए।'
उन्होंने कहा, 'विगत 15 सालों से सत्ता से चिपके असमर्थ-असहाय लोग कहते है कि बिहार सरकार के पास मात्र 500-600 बसें है। हम आपको गरीब मजदूरों की मदद के लिए उससे तीन गुना अधिक बस सौंप रहे है। आप इन बसों का अपनी निगरानी में गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए प्रयोग कीजिए।'
आरजेडी नेता ने कहा, 'माननीय मुख्यमंत्री जी, विपक्ष सरकार को 2000 बस दे रहा है। बसें ले लीजिए और हमारे गरीब बिहारी भाइयों को ले आइए। भले इसका श्रेय भी आप ले लीजिए। हमें कोई आपत्ति नहीं। लेकिन कृपया कर के तत्काल प्रभाव से कुछ कीजिए। कितना सोचेंगे। ये सोचने का समय नहीं कर्तव्य करने का समय है।'
तेजस्वी ने ट्वीट कर कहा, '15 सालों की नीतीश-भाजपा सरकार के पास बिहार में मात्र 600 बसें है। मगर सरकार का विज्ञापन खर्च 500 करोड़ है। हमने मजदूरों को वापस लाने के लिए सरकार को शुरू में 2000 बसों की सहायता प्रदान की है। लेकिन अहंकारी सरकार को बस मीडिया मैनेजमेंट के दम पर ही सारी जंग जीतनी है।'
उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'नीतीश सरकार सृजन और शौचालय समेत 55 घोटाले कर प्रदेश का लाखों-करोड़ रुपये अब तक हजम कर चुकी है। हर वर्ष मानव शृंखला की नौटंकी और ऊपर से उसकी दर्जनों हेलिकॉप्टरों द्वारा फोटोग्राफी पर करोड़ों खर्च करती है। बिहार जैसे गरीब प्रदेश का विज्ञापन पर 500 करोड़ का खर्च है।'
आरजेडी नेता ने कहा, 'यह सरकार कथित जल-जीवन हरियाली के नाम 24500 करोड़ खर्च करती है लेकिन लगभग 40 लाख अप्रवासी बिहारियों के जीवन की कोई चिंता नहीं। सरकार के 15 साल के कथित विकास का भांडा फूट चुका है। इनका सुशासनी दोहरापन उजागर हो चुका है।'