बिहार के मुजफ्फरपुर में जिला प्रशासन को तब शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा जब शहीद खुदीराम बोस के शहीद दिवस पर उन्हें सलामी देने के लिए चलाई गई राइफल से गोली ही नहीं निकली।
स्वतंत्रता सेनानी खुदीराम बोस और उनके साथी प्रफुल्ल चंद्र चाकी के शहीद दिवस पर रविवार को कंपनी बाग में समारोह आयोजित किया गया था, जहां बोस और चाकी के सम्मान में सलामी दी जानी थी।
सलामी देने के लिए जिस राइफल और कारतूस का इस्तेमाल किया गया वे ब्रिटिशकाल के थे और तीस साल पहले खरीदे गए थे।
मुजफ्फरपुर के जिलाधीश अनुपम कुमार ने एसएसपी सौरभ कुमार को मामले की जल्द ही जांच करने के आदेश दिए हैं। इस तरह की घटना को दोबारा होने से रोकने के लिए एसएसपी ने अधिकारियों से दो दिनों के अंदर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
सुरक्षाकर्मियों की बंदूकों से दी सलामी
जिलाधीश और एसएसपी के अनुसार कंपनी बाग में शहीद स्मारक को पाचं पुलिसकर्मी सलामी देने वाले थे जिनमें से कुछ की आखिर समय पर राइफल नहीं चली।
मौके पर मौजूद लोगों के अनुसार राइफल न चलने पर वहां उपस्थित सुरक्षाकर्मियों की राइफल से सलामी दी गई। लेकिन तब तक प्रशासन की बदइंतजामी की पोल खुल चुकी थी।
इस मौके पर स्वतंत्रता सेनानी, जिला प्रशासन अधिकारी और अन्य लोग सुबह आठ बजे से ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे हुए थे।
वहां उपस्थित स्वतंत्रा सेनानियों ने इसे बेइज्जती करार दिया। पुलिस लाइन के सारजेंट मेजर ने राइफल और कारतूस के ब्रिटिशकाल के होने की बात कही।