पूर्णिया के बहुचर्चित युवा व्यवसायी सूरज बिहारी हत्याकांड में मरंगा पुलिस की जांच अब एक महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंच गई है। जेल में बंद सभी सात नामजद अभियुक्तों को रिमांड पर लेकर की गई गहन पूछताछ में मुख्य आरोपी ब्रजेश सिंह ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। पुलिसिया पूछताछ में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ है कि सूरज बिहारी की हत्या किसी बाहरी हथियार से नहीं, बल्कि उनकी ही लाइसेंसी पिस्टल से की गई थी।
थानाध्यक्ष कौशल कुमार के नेतृत्व में पुलिस ने कोर्ट से दो चरणों में कुल 24 घंटे की रिमांड अवधि प्राप्त की थी। रिमांड के पहले चरण में पुलिस ने अभियुक्त स्नेहिल झा, उसके भाई आदित्य ठाकुर और अंशु सिंह से विस्तृत पूछताछ की। इसके पश्चात दूसरे चरण में मुख्य आरोपी ब्रजेश सिंह, उसके भाई नंदू सिंह, रजनीश सिंह और अमन सिंह को रिमांड पर लिया गया। पुलिस का उद्देश्य घटना की कड़ियों को जोड़ना और हत्या में प्रयुक्त हथियार के बारे में पुख्ता जानकारी जुटाना था।
आरोपियों की कराई गई मेडिकल जांच
पूछताछ पूरी होने के बाद सभी आरोपियों की मेडिकल जांच कराई गई और उन्हें पुनः न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। पूछताछ के दौरान मुख्य शूटर ब्रजेश सिंह ने बताया कि घटना वाली रात बसंत विहार में जब विवाद सुलझाने के लिए सूरज बिहारी पहुँचे थे, तब वहां तीखी झड़प शुरू हो गई थी। ब्रजेश के अनुसार, इसी आपाधापी में उसने सूरज बिहारी की लाइसेंसी पिस्टल उनसे छीन ली और उसी हथियार से उन पर गोली चला दी। थानाध्यक्ष ने बताया कि ब्रजेश ने पूछताछ में वही बयान दोहराया है जो उसने शुरुआती गिरफ्तारी के समय दिया था, जिससे अब पुलिस के पास ठोस इकबालिया बयान मौजूद है।
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27 जनवरी को हुई थी हत्या
विदित हो कि बीते 27 जनवरी को गुलाबबाग चौहान टोला निवासी युवा व्यवसायी सूरज बिहारी की मरंगा थाना क्षेत्र के बसंत विहार में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में मृतक के भाई उदय कुमार द्वारा तीन अज्ञात के अलावा सात लोगों को नामजद अभियुक्त बनाया गया था। हत्या के बाद सभी आरोपी लंबे समय तक फरार रहे। पुलिस ने कार्रवाई तेज करते हुए 3 फरवरी को कोर्ट से कुर्की का आदेश प्राप्त किया और आरोपियों के घरों पर इश्तिहार चिपकाया। पुलिस की बढ़ती दबिश और संपत्ति कुर्क होने के डर से सभी सातों आरोपियों ने अंततः न्यायालय और थाने में आत्मसमर्पण कर दिया था।