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पूर्णिया नरसंहार: अंधविश्वास में जिंदा जलाए गए एक ही परिवार के 5 लोग, आयुक्त-DIG से एक हफ्ते में मांगी रिपोर्ट

Wed, 09 Jul 2025 09:17 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया

सार

Purnea Massacre: पूर्णिया नरसंहार पर राज्य सरकार ने गंभीर रुख अपनाते हुए जांच की जिम्मेदारी प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार और डीआईजी प्रमोद कुमार मंडल को संयुक्त रूप से सौंपी है। दोनों अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सात दिनों के भीतर पूरी घटना की विस्तृत जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपें।
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घटनास्थल पर मामले की जांच करने पहुंची पुलिस - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्णिया जिले के टेटगामा गांव में अंधविश्वास के चलते एक ही परिवार के पांच लोगों को जिंदा जलाकर मार डालने की हृदयविदारक घटना ने पूरे बिहार को झकझोर दिया है। इस निर्मम कांड पर राज्य सरकार ने गंभीर रुख अपनाते हुए जांच की जिम्मेदारी प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार और डीआईजी प्रमोद कुमार मंडल को संयुक्त रूप से सौंपी है। दोनों अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे सात दिनों के भीतर पूरी घटना की विस्तृत जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपें।

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दरगाह बहियार में मिली जले हुए शवों की भयावह तस्वीर
घटना के बाद पुलिस को घेसरिया बहियार के जलकुंभी से पांच जले हुए शव मिले, जो कि मृतकों के घर से लगभग डेढ़ किलोमीटर दूर थे। मरने वालों में परिवार के बुजुर्ग कातो मासोमात (70), बेटा बाबूलाल उरांव (50), बहू सीता देवी (40), पोता मनजीत कुमार (25) और उसकी पत्नी रानी देवी (20) शामिल हैं। सभी को पेट्रोल छिड़ककर आग के हवाले कर दिया गया था।

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‘सात घंटे तक घटना चलती रही और किसी को पता नहीं चला?’
प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार ने घटनास्थल का दौरा करने के बाद रजीगंज पंचायत के जनप्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, पंचायत सचिव, स्वास्थ्यकर्मी, वार्ड सदस्य, टोला सेवक समेत सभी जिम्मेदार लोगों को बुलाकर कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने तीखे लहजे में सवाल किया कि घटना स्थल मनरेगा भवन से महज कुछ मीटर की दूरी पर है, जहां 10 बजे रात से सुबह पांच बजे तक हत्या की गई, फिर भी किसी को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी? राजेश कुमार ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह सिर्फ आपराधिक मामला नहीं, प्रशासनिक और सामाजिक विफलता भी है।


 
गांव में नकुल उरांव की दहशत और अंधविश्वास की सत्ता
प्राथमिक जांच में सामने आया है कि इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड नकुल उरांव है, जो गांव में अपना वर्चस्व रखता है और अंधविश्वास फैलाने में माहिर है। माना जा रहा है कि गांव के कुछ जनप्रतिनिधि भी उसके प्रभाव में रहते हैं, जिसके कारण इतने बड़े नरसंहार की योजना चुपचाप बनाई और अंजाम दी गई।
 
राजेश कुमार ने पूछा कि जब हत्या से पहले तीन गांवों की बैठक हुई थी, तब पंचायत के किसी प्रतिनिधि को सूचना क्यों नहीं मिली? क्या ये भी अंधविश्वास के प्रभाव में हैं?
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वहीं, जिस स्थान पर घटना हुई, वह दो मोहल्लों और सरकारी भवनों से घिरा इलाका है। बावजूद इसके, रात भर हत्या की गई और किसी सरकारी कर्मचारी, वार्ड सदस्य, मुखिया या पंचायत प्रतिनिधि को कोई खबर नहीं हुई, जिससे प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की संवेदनशीलता और सतर्कता पर गहरे सवाल खड़े हो गए हैं।

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एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपेंगे आयुक्त व डीआईजी
प्रमंडलीय आयुक्त राजेश कुमार और पूर्णिया डीआईजी प्रमोद कुमार मंडल ने कहा कि वे घटना की हर सामाजिक, प्रशासनिक और आपराधिक पहलुओं की जांच कर रहे हैं और एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी जाएगी। इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई तय होगी।

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