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बिहार: पीडीएस डीलर चयन में 1.5 करोड़ की कथित वसूली! फर्जी प्रमाणपत्र से लेकर सूची में गड़बड़ी तक, जांच शुरू

Sat, 03 Oct 2026 09:39 AM IST
पूर्णिया ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया

सार

पूर्णिया के बनमनखी अनुमंडल में पीडीएस डीलर चयन प्रक्रिया को लेकर रिश्वतखोरी, फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्र और सूची में अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर करीब 1.5 करोड़ रुपये की कथित अवैध वसूली का आरोप लगाया है।
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्णिया के बनमनखी अनुमंडल में जन वितरण प्रणाली (पीडीएस) डीलर चयन प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। अभ्यर्थियों से रिश्वत मांगने, फर्जी शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के आधार पर चयन कराने और सूची में अनियमितता किए जाने की शिकायत की गई है। मामले को लेकर नगर परिषद बनमनखी निवासी अमित कुमार और ओमप्रकाश साह ने जिलाधिकारी अंशुल कुमार और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. शौर्य सुमन को लिखित आवेदन देकर जांच और कार्रवाई की मांग की है। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने साइबर पुलिस उपाधीक्षक को पूरे मामले की निष्पक्ष और जल्द जांच करने का निर्देश दिया है।

पीडीएस डीलर का लाइसेंस दिलाने के नाम पर 1.5 करोड़ रुपये वसूली का आरोप

शिकायतकर्ताओं के अनुसार, पीडीएस डीलर का लाइसेंस दिलाने के नाम पर अनुमंडल कार्यालय के कुछ कर्मियों और बिचौलियों के बीच कथित सिंडिकेट सक्रिय था। आरोप है कि अभ्यर्थियों से कुल करीब 1.5 करोड़ रुपये की अवैध वसूली की गई। आवेदन में अनुमंडल कार्यालय के नाजिर कन्हैया झा, निजी बिचौलिये दिलीप कुमार शर्मा और रंजन कुमार पर प्रति अभ्यर्थी दो लाख रुपये तक मांगने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं ने अपने आरोपों के समर्थन में 22 अप्रैल 2026 को डिजिटल माध्यम से 25 हजार रुपये अग्रिम दिए जाने के साक्ष्य भी अधिकारियों को सौंपे हैं। इसके अलावा बड़े बाबू अभिषेक द्वारा रुपये की मांग किए जाने से संबंधित ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जांच के लिए दी गई है।

बैक डेट में प्रमाणपत्र जोड़ने का लगाया आरोप

आवेदकों ने चयन प्रक्रिया में शैक्षणिक प्रमाणपत्रों को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि नगर परिषद की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अनुमंडल कार्यालय पहुंचने के बाद कुछ अभ्यर्थियों के स्नातक और स्नातकोत्तर के प्रमाणपत्र कथित तौर पर बैक डेट में जोड़े गए। शिकायत में नगर परिषद के वार्ड-25 की अंजली कुमारी और वार्ड-04 निवासी बिचौलिये दिलीप कुमार शर्मा की पत्नी सोनी कुमारी के शैक्षणिक दस्तावेजों को संदिग्ध बताया गया है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

डिजीलॉकर सत्यापन के नाम पर 70 हजार लेने का भी आरोप

शिकायतकर्ताओं ने डिजीलॉकर सत्यापन के नाम पर 70 हजार रुपये लिए जाने का भी आरोप लगाया है। इसके साथ ही आधिकारिक पत्र में 398 अभ्यर्थियों का उल्लेख होने के बावजूद अंतिम सूची में 401 नाम शामिल किए जाने पर भी सवाल उठाया गया है। आवेदकों ने इसे चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रशासनिक निष्पक्षता से जोड़ते हुए जांच की मांग की है।

पेनड्राइव में सौंपे ऑडियो-वीडियो और लेनदेन के साक्ष्य

शिकायतकर्ताओं ने जांच टीम को पेनड्राइव के जरिए ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराई है। इसके अलावा ऑनलाइन लेनदेन के स्क्रीनशॉट और संदिग्ध अंकपत्रों की प्रतियां भी सौंपी गई हैं। उन्होंने मांग की है कि जांच पूरी होने तक पीडीएस डीलरों के लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। उन्होंने अनुमंडल कार्यालय में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित रखने और शिकायत करने वाले लोगों को जान-माल की सुरक्षा देने की भी मांग की है।

साइबर डीएसपी की जांच शुरू, आरोपों की होगी पड़ताल

जिलाधिकारी के निर्देश के बाद साइबर पुलिस उपाधीक्षक ने मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान रिश्वत मांगने के आरोप, डिजिटल लेनदेन, ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, शैक्षणिक प्रमाणपत्रों और अंतिम चयन सूची में नामों के अंतर से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी। शिकायत सामने आने के बाद मामले में कथित रूप से शामिल कर्मियों और बिचौलियों के बीच भी हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है।

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