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बिहार न्यूज: 31 साल बाद लौटा बेटा, बदला नाम और पहचान; मां ने एक निशान से पहचान लिया अपना लाल

Sat, 24 Oct 2026 02:10 PM IST
पूर्णिया ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कटिहार

सार

बिहार के कटिहार जिले में 31 साल पहले लापता हुआ पिंटू यादव अब्दुल जब्बार के नाम से अपने परिवार के पास लौट आया है। बचपन में दोस्तों के साथ ट्रेन में चढ़ने के बाद वह पश्चिम बंगाल के राधिकापुर-कालियागंज पहुंच गया था, जहां एक मुस्लिम परिवार ने उसे अपनाकर पाला-पोसा।
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31 साल बाद घर लौटा लापता बेटा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार के कटिहार जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो किसी फिल्म की कहानी जैसी लगती है, लेकिन यह पूरी तरह वास्तविक है। हिंदू परिवार में जन्मा एक बच्चा 31 साल पहले लापता हो गया था। वह पश्चिम बंगाल के राधिकापुर-कालियागंज पहुंच गया, जहां एक मुस्लिम परिवार ने उसे अपनाकर पाला-पोसा। समय के साथ उसका नाम पिंटू यादव से अब्दुल जब्बार हो गया। अब 31 साल बाद वह अपने परिवार के पास लौट आया है। मां ने आंख के ऊपर मौजूद कटे हुए निशान को देखकर अपने बेटे को पहचान लिया। इस तरह वर्षों से बिछड़े परिवार का मिलन हुआ और पूरे गांव में इस कहानी की चर्चा हो रही है।

दोस्तों के साथ ट्रेन में चढ़ा, फिर बिछड़ गया परिवार

जानकारी के अनुसार, कटिहार जिले के मनिहारी प्रखंड के कटाकोश गांव निवासी मोतीलाल यादव का बेटा पिंटू यादव करीब नौ से दस साल का था, जब वह अपने दोस्तों के साथ खेलते-खेलते ट्रेन में चढ़ गया। सफर के दौरान उसे नींद आ गई। इस बीच उसके सभी दोस्त ट्रेन से उतर गए, लेकिन पिंटू सोता रह गया। जब उसकी नींद खुली, तब तक वह ट्रेन से पश्चिम बंगाल के राधिकापुर-कालियागंज पहुंच चुका था। इस तरह वह अपने परिवार से बिछड़ गया।

मुस्लिम परिवार ने अपनाया, शादी भी कराई

अजनबी जगह पर भटक रहे बच्चे को देखकर एक मुस्लिम परिवार ने उसे अपने साथ रख लिया। परिवार ने उसे अपने बेटे की तरह पाला-पोसा और बड़ा किया। वह इसी परिवार के साथ रहने लगा। मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार उसकी शादी भी कराई गई। अब पिंटू, जो अब्दुल जब्बार के नाम से जाना जाता है, के तीन बच्चे हैं। वह अपने परिवार का भरण-पोषण करने के लिए दिल्ली में मजदूरी करता है।

बचपन की धुंधली यादों के सहारे खोजता रहा अपना परिवार

अब्दुल जब्बार के मन में बचपन और अपने पुराने परिवार की यादें कहीं न कहीं बनी हुई थीं। वह लगातार अपनी धुंधली यादों के सहारे अपने परिवार को खोजने की कोशिश करता रहा। इसी दौरान दिल्ली में काम करने वाले मनिहारी के कुछ मजदूरों के माध्यम से उसे अपने परिवार के बारे में कुछ जानकारी मिली। इन जानकारियों के आधार पर वह अपने पुराने घर और परिवार तक पहुंच गया।

आंख के ऊपर का निशान देखकर मां ने पहचाना बेटा

31 साल बाद घर लौटे पिंटू यादव को देखकर परिवार के सामने पुराने रिश्तों की कड़ियां जुड़ने लगीं। मां ने उसकी आंख के ऊपर मौजूद कटे हुए निशान को देखा और उसे अपना बेटा पहचान लिया। धीरे-धीरे परिवार को यकीन हो गया कि अब्दुल जब्बार ही उनका खोया हुआ बेटा पिंटू यादव है। इस पहचान ने 31 साल से बिछड़े परिवार को फिर से एक कर दिया।

धर्म और नाम को लेकर परिवार ने कही बड़ी बात

लंबे इंतजार के बाद बेटे के लौटने से परिवार में खुशी का माहौल है। माता-पिता का कहना है कि उनका बेटा जिस धर्म में रहना चाहे और जिस तरह से अपनी जिंदगी जीना चाहे, वह उसके लिए स्वतंत्र है। उन्हें या समाज को इस बात से कोई आपत्ति नहीं है। उनके लिए सबसे बड़ी खुशी यह है कि वर्षों पहले बिछड़ा बेटा आखिरकार घर लौट आया है। वहीं, पिंटू उर्फ अब्दुल जब्बार भी अपने माता-पिता और परिवार से दोबारा मिलकर बेहद खुश है। हालांकि, वह अभी इस कशमकश में है कि आगे की जिंदगी किस नाम और पहचान के साथ बिताए। फिलहाल उसके लिए सबसे बड़ी बात 31 साल बाद अपने परिवार का साथ मिलना है। कटाकोश गांव में पिंटू यादव के लापता होने, अब्दुल जब्बार के नाम से नई जिंदगी बिताने और फिर इतने वर्षों बाद घर लौटने की यह कहानी चर्चा का विषय बनी हुई है।

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