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Bihar: गुलाम रसूल के 'मुसलमान गद्दार' बयान पर राजनीति गरमाई, AIMIM सीमांचल प्रभारी ने जदयू का 'गुलाम' बताया

Thu, 12 Dec 2024 02:31 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, किशनगंज

सार

बिहार के किशनगंज जिले में गुलाम रसूल बलियावी द्वारा दिए गए बयान 'मुसलमान गद्दार' पर राजनीति गरमा गई है। बयान का जवाब देते हुए AIMIM सीमांचल प्रभारी ने जदयू का गुलाम बताया। वहीं, जेडीयू अल्पसंख्यक अध्यक्ष बोले कि बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया गया।
 
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गुलाम हसनैन और अमीर मिन्हाज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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किशनगंज में गुलाम रसूल बलियावी द्वारा दिए गए बयान को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विभिन्न पार्टियों के द्वारा लगातार बड़े बयान दिए जा रहे हैं। इसी क्रम में एआईएमआईएम के सीमांचल प्रभारी गुलाम हसनैन ने जहां गुलाम रसूल बलियावी को जदयू का गुलाम बताया है। वहीं, जदयू के अल्पसंख्यक जिला अध्यक्ष ने बयान का समर्थन किया है।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, बीते दिनों किशनगंज में जदयू के एक बड़े सम्मेलन के दौरान जदयू नेता गुलाम रसूल बलियावी ने अपने भाषण को संबोधित करते हुए कहा, अगर मुसलमान जदयू को वोट नहीं देते हैं तो गद्दार होंगे। इस पर AIMIM पार्टी के सीमांचल प्रभारी गुलाम हसनैन ने जमकर तंज कसा है।

जहां गुलाम हसनैन ने कहा कि गुलाम रसूल बलियावी साहब गुलाम ए रसूल हैं, लगता है गुलाम ए नीतीश हैं। आप अपने अंदर झंझोड़ कर देखिए, जिस दिन हमारे नबी के गुस्ताख में कुछ लोग अनगढ़ बात बोले, तब आपकी सरकार कहां थी। NRC में कहां थे, तीन तलाक में कहां थे। जब हमारे नबी के बारे में बोला गया था तो उस दिन आप गद्दार थे। इसलिए आप हम मुसलमानों का फैसला न लें। आप अपने निजी कुर्सी के लिए ये भ्रम न फैलाएं, यहां के मुसलमान अक्लमंद हैं कि बाबरी मस्जिद के कातिलों के साथ खड़ा होना चाहिए या गुजरात के खूनी दरिंदों के साथ खड़ा होना चाहिए।
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बयान को तोड़मरोड़ कर किया गया पेश : जदयू अल्पसंख्यक जिला अध्यक्ष
वहीं, इस बयान पर जदयू के अल्पसंख्यक जिला अध्यक्ष आमीर मिन्हाज ने कहा कि गुलाम रसूल बलियावी के बयान को तोड़मरोड़ कर पेश किया जा रहा है। उनके बोलने का अर्थ यह था कि जिस तरीके से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अल्पसंख्यक के लिए काम किया है, उसके अपेक्षा जदयू को मुसलमानों का वोट नहीं मिल रहा है और अगर आपके बारे में कोई सोच रहा है और आप उनके बारे के नहीं सोच रहे हैं तो आप नाइंसाफी कर रहे हैं, उनके बोलने का मकसद ये था।

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