कटिहार के बाढ़ग्रस्त इलाकों में ड्यूटी निभाना किसी मिशन इम्पॉसिबल से कम नहीं। कोढ़ा प्रखंड के उत्क्रमित मध्य विद्यालय पेकाहा की स्थिति ही देख लीजिए चारों ओर पानी का समंदर, नाव का नामोनिशान नहीं और ऊपर से ड्यूटी का दबाव। यहां के शिक्षक-शिक्षिकाएं सिर्फ बच्चों को पढ़ाने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बूथ लेवल ऑफिसर के तौर पर चुनावी जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं। बाढ़ के बीच स्कूल पहुंचना किसी खतरनाक मिशन जैसा है। देरी से पहुंचो तो मोबाइल नेटवर्क की मार और फिर ई-शिक्षा पोर्टल पर अटेंडेंस का झंझट।
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शिक्षिका शालिनी मिश्रा बताती हैं कि स्कूल पहुंचना मतलब जान हथेली पर रख लेना। वहीं बीएलओ की ड्यूटी संभाल रहे शिक्षक चुनेश्वर दास कहते हैं कि चारों तरफ पानी ही पानी है, लेकिन ड्यूटी तो करनी ही है। नाव नहीं तो पैदल कीचड़ और पानी में चलकर जाना पड़ता है। कई जगह पानी इतना गहरा कि एक गलत कदम भारी पड़ सकता है। हालात इतने मुश्किल हैं कि कई बार शिक्षक बाढ़ के पानी में भटकते हुए नेटवर्क ढूंढते रहते हैं। समय पर अटेंडेंस दर्ज न होने पर विभागीय कार्रवाई का डर भी बना रहता है।
इसके बावजूद इन शिक्षकों और बीएलओ का हौसला कम नहीं होता। तेज बहाव हो, लगातार बारिश हो या नेटवर्क पूरी तरह से गायब, ये जमीनी कर्मी हर हाल में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। कटिहार की यह तस्वीर साफ बताती है कि बाढ़ चाहे जितनी विकराल हो, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा-भाव से भरे इन लोगों के जज्बे को डुबो पाना आसान नहीं।