पूर्णिया जिले में अंधविश्वास के चलते एक ही परिवार के पांच लोगों को जिंदा जलाकर मार डालने की हृदयविदारक घटना ने पूरे बिहार को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस मामले की तेजी से जांच कर रही है, जिसकी मॉनिटरिंग खुद डीआईजी प्रमोद कुमार मंडल कर रहे हैं। पुलिस ने मुख्य आरोपी नकुल उरांव समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। गिरफ्तार आरोपियों में नकुल उरांव, छोटू उरांव और ट्रैक्टर चालक मोहम्मद सनाउल्लाह शामिल हैं। घटना के बाद से गांव के सभी पुरुष घर छोड़कर फरार हैं।
बच्चे की मौत को बनाया डायन प्रथा का बहाना
स्थानीय लोगों के मुताबिक मृतक बाबूलाल उरांव के पड़ोसी रामदेव उरांव का आठ वर्षीय बेटा धान का बिचड़ा उखाड़ने खेत गया था। वह सुबह से भूखा था और दोपहर में घर लौटते ही कपड़े बदलते वक्त आंगन में गिरकर बेहोश हो गया। परिजन उसे अस्पताल ले जाने के बजाय गांव के तांत्रिक नकुल उरांव के पास ले गए, जहां देर रात तक झाड़-फूंक चलती रही, लेकिन बच्चे की मौत हो गई। इसके बाद नकुल उरांव ने अपने बचाव के लिए कहानी गढ़ दी कि बच्चे की मौत के पीछे बाबूलाल उरांव और उसकी मां कातो मसोमात का हाथ है। उसने मृतक के पिता राजाराम उरांव को बहकाया कि बाबूलाल ने तंत्र-मंत्र से उसके बेटे की बलि ली है।
चार दिन से दबाव बना रहे थे परिजन
बच्चे की मौत के बाद राजाराम उरांव के परिवार ने बाबूलाल पर दबाव बनाना शुरू कर दिया कि वह उनके बेटे को जिंदा करे। इस दौरान राजाराम के घर के दो और बच्चों की तबीयत भी बिगड़ गई। मामूली सर्दी-खांसी और बुखार होने पर उन्हें भी नकुल उरांव के पास ही झाड़-फूंक के लिए ले जाया गया। मामला तब और गंभीर हो गया जब गांव में पंचायत बैठी और नकुल उरांव ने बाबूलाल पर डायन प्रथा के तहत तंत्र-मंत्र से बच्चों की हत्या का आरोप लगाया।
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लाठी से पीटकर पेट्रोल डालकर जलाया गया पूरा परिवार
गांव के लोगों ने तांत्रिक नकुल उरांव के उकसावे में आकर बाबूलाल उरांव और उसके परिवार पर हमला कर दिया। पहले तो उन्हें लाठियों से पीटा गया, फिर उन पर पेट्रोल छिड़ककर जिंदा जला दिया गया। शवों को ठिकाने लगाने के लिए पहले से ट्रैक्टर की व्यवस्था कर ली गई थी और जलने के बाद शवों को पास के पोखर में फेंक दिया गया। यह सब उस वक्त किया गया जब पुलिस धार्मिक जुलूस में सुरक्षा-व्यवस्था संभालने में व्यस्त थी।
ट्रैक्टर चालक ने शव ठिकाने लगाने के लिए लिया 40 हजार रुपये
पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि शवों को पोखर में फेंकने के लिए ट्रैक्टर चालक मोहम्मद सनाउल्लाह को 40 हजार रुपये दिए गए थे। डीआईजी प्रमोद कुमार मंडल ने कहा कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
तीन गिरफ्तार, अन्य की तलाश में छापेमारी जारी
अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। डीआईजी प्रमोद कुमार मंडल ने बताया कि बाकी फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी चल रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी सूरत में इस अमानवीय कांड में शामिल लोगों को छोड़ा नहीं जाएगा।