किशनगंज की गलियों से लेकर खेत-खलिहानों तक, अब सिर्फ हवा नहीं चल रही, लोकतंत्र की लहर दौड़ रही है। कहीं चाय की दुकान पर बहसों का शोर है, तो कहीं चौपालों पर उम्मीदों की फुसफुसाहट। हर आंख में सवाल है, हर दिल में जिज्ञासा, “इस बार किसे मिलेगी सत्ता की चाबी?” अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ जब किशनगंज की मिट्टी पर पहुंचा, तो लगा जैसे यह इलाका चुनावी ऊर्जा से धधक उठा हो। यह सिर्फ प्रचार का मौसम नहीं, बल्कि जनमत के जागरण का उत्सव है, जहां हर आवाज मायने रखती है और हर वोट बदल सकता है बिहार का भविष्य।
रमीज रजा ने कहा, “सीमांचल में सबसे बड़ी समस्या रोजगार की कमी और बेरोजगारी है। लोग यहां से पलायन रोकना चाहते हैं। तेजस्वी यादव भी इसी मुद्दे पर काम कर रहे हैं, इसलिए हम उनका समर्थन कर रहे हैं।”
मोहम्मद केसर आलम ने कहा, “सीमांचल, खासकर कोचाधामन में हम JDU के पूर्व विधायक मास्टर मुजाहिद का समर्थन कर रहे हैं। इस बार वे राजद से चुनाव लड़ रहे हैं और निश्चित रूप से जीतेंगे। वक्फ बिल और NRC के मुद्दे की वजह से उन्होंने जदयू छोड़ दी थी।”
सरफराज अहमद ने कहा, “इस बार फिर से AIMIM को जीत मिलेगी। हम विकास के मुद्दे पर वोट देंगे और हमारी पार्टी भू-माफिया के खिलाफ लड़ रही है।” उन्होंने आगे कहा, “हमारी पार्टी महागठबंधन में शामिल होना चाहती थी, लेकिन हमें शामिल नहीं किया गया। ये लोग मुसलमानों का वोट तो चाहते हैं, लेकिन AIMIM को अपने साथ नहीं लेना चाहते।”
फिरदौस आलम ने कहा, “AIMIM किसकी सरकार बनाना चाहती है, ये सवाल उनसे ही पूछना चाहिए। इस बार RJD की सरकार बनेगी, क्योंकि वे असली मुद्दों पर बात करते हैं, हिंदू-मुस्लिम की राजनीति नहीं करते।”
डॉ. आमिर मीनाज ने कहा, “पहले मैं जदयू में था, अब मैं RJD में हूं। आज देश में दो तरह की सोच चल रही है, एक तरफ सांप्रदायिक ताकतें हैं और दूसरी तरफ महागठबंधन है। बिहार के लोग महागठबंधन की सरकार बनाना चाहते हैं। हम बिहार को यूपी और असम जैसा नहीं बनने देंगे।” मोहम्मद आलम ने कहा, “यहां कहना मुश्किल है, लेकिन मुकाबला AIMIM और RJD के बीच है। यहां दो प्रतिशत वोटों का अंतर बड़ा असर डाल सकता है, जिसका नुकसान RJD को हो सकता है।”