अररिया की धरती पर अब सिर्फ हवा नहीं बह रही, बल्कि उसमें राजनीति की गूंज भी घुल चुकी है। खेतों में लहराती फसलें अब उम्मीदों की कहानियां सुनाती हैं, और चौपालों की हर चर्चा का सिरा चुनाव तक पहुंच जाता है। अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ जब अररिया पहुंचा, तो लगा जैसे पूरा जिला लोकतंत्र के रंगों में रंग गया हो, कहीं बहस, कहीं उम्मीदें, और हर चेहरे पर एक ही सवाल की परछाई “इस बार किसे मिलेगी सत्ता की चाबी?”
स्थानीय निवासी अशरफ अंसारी ने कहा, “बिहार में रोजगार की बहुत कमी है। इस बार हम उसी उम्मीदवार को वोट देंगे जो रोजगार की समस्या दूर कर सके। तेजस्वी यादव रोजगार की बात कर रहे हैं, इसलिए हम उन्हें जिताना चाहते हैं।”
रुखसार ने बताया, “हम लोगों को काम करने के लिए बिहार से बाहर जाना पड़ता है। वहां हमें दर-दर भटकना पड़ता है। इसलिए इस बार हम उसी पार्टी को वोट देंगे जो बिहार में रोजगार दे सके। हम चाहते हैं कि नई सरकार यहां फैक्ट्रियां लगवाए, ताकि हमें बाहर न जाना पड़े।”
अशोक कुमार ने कहा, “बिहार में नौकरी बहुत कम है और जो नौकरियां हैं, उनमें वेतन बहुत कम मिलता है। इस वजह से लोग मजबूर होकर बाहर काम करने जाते हैं। इसके अलावा भ्रष्टाचार भी बहुत बढ़ गया है, बिना पैसे दिए कोई काम नहीं होता। सरकार को इस दिशा में ध्यान देना चाहिए।”
बिहारी बाबू ने कहा, “बिहार में इस बार सरकार बदलनी चाहिए। राज्य में विकास की जरूरत है। हम चाहते हैं कि हमारे यहां भी तरक्की हो और लोगों को बेहतर सुविधाएं मिलें।” विकास यादव ने कहा, “एनडीए सरकार के दौरान काफी विकास हुआ है। लोगों ने बदलाव देखा है। सरकार नौकरी देने की कोशिश कर रही है, लेकिन कोई भी सरकार सबको नौकरी नहीं दे सकती।”
श्याम दुबे राय ने कहा, “आज के युवाओं की सोच बदल गई है। बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है। किसानों को भी बहुत परेशानी हो रही है, उन्हें समय पर खाद तक नहीं मिल पा रही है।” पवन कुमार यादव ने कहा, “इस बार बिहार में महागठबंधन की सरकार बनेगी। इस चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा रोजगार है, इसलिए हम इस बार बदलाव करेंगे।”