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कोचिंग की आड़ में हैवानियत: नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म मामले में संचालक को 10 साल की सजा, जुर्माना भी ठोका

Wed, 04 Feb 2026 09:47 AM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अररिया

सार

Araria News: अररिया पॉक्सो कोर्ट ने कोचिंग संचालक अमित कुमार अमन को नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के लिए 10 वर्ष सश्रम कारावास और 90 हजार जुर्माने की सजा सुनाई। पीड़िता को 3 लाख मुआवजा दिया जाएगा। कोर्ट ने आईटी एक्ट की धाराओं में भी सजा सुनाई और सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
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अररिया व्यवहार न्यायालय - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अररिया जिले के पॉक्सो कोर्ट ने एक नाबालिग छात्रा से दुष्कर्म के मामले में कोचिंग संचालक अमित कुमार अमन को दोषी करार दिया है। कोर्ट ने आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और कुल 90 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने शिक्षा के नाम पर अपराध को बर्दाश्त न करने का सख्त संदेश दिया है।

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आधार सुधार के बहाने की गई साजिश
अदालत के अनुसार, आरोपी कोचिंग संचालक पीड़ित छात्रा को आधार कार्ड में सुधार कराने का झांसा देकर 7 जुलाई 2023 को रानीगंज ले गया। वहां अपने मित्र के किराए के मकान में आरोपी ने छात्रा को नशीला पदार्थ पिलाया और उससे दुष्कर्म किया। यह घटना कोचिंग संचालक द्वारा छात्रा के भरोसे का दुरुपयोग करके अंजाम दी गई।
 
पीड़िता की हिम्मत से हुआ खुलासा
पीड़िता ने खुद महिला थाना में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर कांड संख्या 28/2023 के तहत मामला दर्ज हुआ। विशेष पॉक्सो वाद संख्या 7/2024 के तहत चल रही सुनवाई में सभी साक्ष्यों और गवाहों की जांच के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराया।
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सजा और धाराओं का विवरण
अदालत ने आरोपी को निम्नलिखित धाराओं में सजा सुनाई है। भारतीय दंड संहिता (भादवि) की धारा 376 के तहत 10 वर्ष का सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया। सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (आईटी एक्ट) की धारा 67 के तहत 3 वर्ष का कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना, जबकि धारा 67(ए) के तहत भी 3 वर्ष का कारावास और 20 हजार रुपये का जुर्माना सुनाया गया। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

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पीड़िता को मिलेगा मुआवजा
अदालत ने पीड़िता को विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के अंतर्गत 3 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान करने का आदेश दिया है। यह राशि पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के लिए दी जाएगी।
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मामले में सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक श्याम लाल यादव ने मजबूती से पक्ष रखा, जबकि बचाव पक्ष ने भी अपनी दलीलें प्रस्तुत कीं। सभी उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों और सबूतों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया और उसे तत्काल जेल भेज दिया।

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