बिहार पुलिस ने जारी किया यातायात पुलिस का नया लोगो
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बिहार में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और यातायात व्यवस्था को सुचारु करने के लिए राज्य की पुलिस लगातार सुधारात्मक और प्रभावी कदम उठा रही है। यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कई नई तकनीकों और अभियानों को लागू किया गया है। इन प्रयासों का उद्देश्य न केवल सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देना है, बल्कि यातायात नियमों के प्रति लोगों की जागरूकता को भी बढ़ाना है।
दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए समेकित प्रयास
राज्य के कई क्षेत्र सड़क दुर्घटनाओं की दृष्टि से संवेदनशील हैं। इन क्षेत्रों में दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वित प्रयास किए जा रहे हैं। सड़क दुर्घटना संभावित स्थलों का गहन विश्लेषण कर उनके वैज्ञानिक समाधान पर कार्य हो रहा है। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में Institute of Road Traffic Education (IRTE) द्वारा तैयार की गई परियोजना रिपोर्ट पर चर्चा की गई। इसके तहत पटना शहर और पटना-मुजफ्फरपुर राजमार्ग के 50 किलोमीटर के एक खंड को मॉडल स्ट्रेच के रूप में विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य सड़क और यातायात अभियंत्रण के माध्यम से दुर्घटनाओं को कम करना है।
पारदर्शी और साक्ष्य-आधारित प्रवर्तन प्रणाली
राज्य में यातायात नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए प्रवर्तन प्रणाली में बदलाव किया गया है।
- ई-डिटेक्शन पोर्टल, हैंड हेल्ड डिवाइस (HHD) और बॉडी वॉर्न कैमरे के जरिए न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप के साथ साक्ष्य-आधारित कार्रवाई की जा रही है।
- मैनुअल चालान की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। अब सभी कार्रवाई डिजिटल माध्यम से हो रही है। चालान के दौरान स्थान, तिथि और समय का विवरण फोटोग्राफ और वीडियो के माध्यम से प्रमाणित किया जाता है।
हालांकि, कुछ मामलों में निजी मोबाइल का उपयोग कर चालान करने की शिकायतें सामने आई थीं। इसे रोकने के लिए कड़े निर्देश जारी किए गए हैं। ऐसा पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
यातायात नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई
यातायात नियमों के बार-बार उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के तहत 10,000 से अधिक ऐसे वाहन चालकों की पहचान की गई है, जिन्होंने तीन या उससे अधिक बार नियम तोड़े हैं। इन मामलों में उनके चालक अनुज्ञप्ति को निलंबित या रद्द करने का प्रस्ताव संबंधित जिला परिवहन अधिकारियों को भेजा गया है।
यातायात बलों की संख्या में वृद्धि
राज्य सरकार ने यातायात पुलिस बल को मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं।
- राज्य में 10,332 पदों की स्वीकृति पहले से दी गई थी।
- 28 नए जिलों में यातायात थानों के लिए 4,215 पद स्वीकृत किए गए हैं।
- हाइवे पेट्रोलिंग योजना के लिए 1,560 पद स्वीकृत किए गए हैं।
- विशेष रूप से पटना जिले में 1,807 अतिरिक्त बलों की तैनाती की गई है।
आधुनिक तकनीक से यातायात का प्रबंधन
यातायात व्यवस्था को सुचारु और सुरक्षित बनाने के लिए तकनीकी नवाचारों का भी सहारा लिया जा रहा है। ई-चालान प्रणाली और बॉडी वॉर्न कैमरे जैसे उपकरण इस दिशा में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इन उपायों से न केवल प्रवर्तन में पारदर्शिता आई है, बल्कि राजस्व में भी वृद्धि हुई है।
सड़क सुरक्षा के लिए व्यापक दृष्टिकोण
बिहार पुलिस के इन प्रयासों का उद्देश्य केवल कानून लागू करना नहीं है, बल्कि सड़क सुरक्षा को एक सांस्कृतिक परिवर्तन का हिस्सा बनाना है। मॉडल स्ट्रेच परियोजना और प्रशिक्षण कार्यक्रमों के जरिए सड़क अभियंत्रण और यातायात प्रबंधन के उन्नत तरीकों को अपनाया जा रहा है।