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बिहार: 'इतना बड़ा झूठ लालू यादव ही बोल सकते हैं'- नीतीश कुमार के वाकये पर शिवानंद तिवारी ने क्यों लिखा ऐसा?

Sun, 30 Aug 2026 02:59 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar Politics: वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने एक बार फिर से लालू प्रसाद यादव पर हमला बोला है। उन्होंने राजद प्रमुख के उस पुराने इंटरव्यू में किए गए दावे पर सवाल उठाया है। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा?
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शिवानंद तिवारी, लालू प्रसाद और नीतीश कुमार की फाइल फोटो। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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वरिष्ठ समाजवादी नेता और कभी राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख के करीबी रहे शिवानंद तिवारी ने एक बार फिर लालू यादव पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर 2015 में दिए गए लालू यादव के एक पुराने इंटरव्यू का जिक्र करते हुए उनके एक दावे को गलत बताया है। शिवानंद तिवारी ने कहा कि कुर्मी चेतना रैली में नीतीश कुमार को लालू यादव ने नहीं भेजा था, बल्कि वह खुद नीतीश कुमार को लेकर गांधी मैदान गए थे। पूर्व राज्यसभा सांसद शिवानंद तिवारी ने लिखा कि अचानक उनकी नजर जनवरी 2015 में लिए गए लालू यादव के एक इंटरव्यू पर पड़ी। इंटरव्यू में एक पत्रकार से बातचीत के दौरान लालू यादव ने कहा था कि कुर्मी चेतना रैली में उन्होंने ही नीतीश कुमार को भेजा था। शिवानंद तिवारी ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इतना बड़ा झूठ लालू ही बोल सकते हैं।

 

'मेरी ही गाड़ी थी और मैं ही ड्राइवर था'

वरिष्ठ समाजवादी नेता शिवानंद तिवारी ने अपने पोस्ट में दावा किया कि कुर्मी चेतना रैली वाले दिन नीतीश कुमार उन्हें साथ लेकर लालू यादव से मिलने गए थे। उन्होंने कहा कि उस समय गाड़ी उनकी थी और गाड़ी भी वही चला रहे थे। उन्होंने लिखा कि लालू यादव नहीं चाहते थे कि नीतीश कुमार कुर्मी चेतना रैली में जाएं। हालांकि, लालू ने नीतीश को सीधे तौर पर रैली में जाने से मना नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने अपने पुराने अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें भी कई जगहों से इस तरह की रैलियों में शामिल होने का निमंत्रण मिलता है, लेकिन वह ऐसी रैलियों में नहीं जाते। शिवानंद तिवारी के मुताबिक, लालू यादव का मकसद नीतीश कुमार को रैली में जाने से हतोत्साहित करना था। उन्होंने लिखा कि लालू बहुत चालाकी से नीतीश को रैली में नहीं जाने के लिए निरुत्साहित कर रहे थे।

 

'जनता गांधी मैदान में और नेता घर में, इसका क्या मतलब है?'

शिवानंद तिवारी ने बताया कि एक अणे मार्ग से निकलकर वे नीतीश कुमार के फ्लैट पर पहुंचे। वहां नीतीश कुमार काफी पशोपेश में थे। शिवानंद के मुताबिक, उन्होंने नीतीश कुमार से कहा कि जनता गांधी मैदान में और नेता घर में! इसका क्या मतलब है? नेता और जनता अलग-अलग, यह कैसे? उन्होंने बताया कि नीतीश कुमार रैली में जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें इस बात को लेकर संकोच था कि रैली सफल होगी या नहीं। शिवानंद तिवारी ने कहा कि रैली के पीछे काम कर रहे लोगों ने काफी वैज्ञानिक तरीके से तैयारी की थी और वे लगातार नीतीश कुमार को भी इसकी जानकारी दे रहे थे।

 

'चलिए, चला जाए' और गांधी मैदान पहुंच गए नीतीश

शिवानंद तिवारी के अनुसार, उनकी बात सुनने के बाद नीतीश कुमार ने तुरंत कहा कि चलिए, चला जाए। इसके बाद दोनों उसी गाड़ी से गांधी मैदान पहुंचे, जिसे शिवानंद तिवारी खुद चला रहे थे। उन्होंने बताया कि गांधी मैदान में मंच के पीछे गाड़ी रोकी गई। उस वक्त भोला बाबू का भाषण चल रहा था। उनके भाषण के दौरान नीतीश कुमार का नाम लिए जाने का विरोध किया जा रहा था। शिवानंद तिवारी ने लिखा कि उस समय मंच से कहा जा रहा था कि नीतीश कुमार का नाम लेना पाप है, पाप है, पाप है।

 

'नीतीश ने महफिल लूट ली'

शिवानंद तिवारी ने अपने पोस्ट में दावा किया कि इसके बाद नीतीश कुमार मंच पर पहुंचे और स्थिति पूरी तरह बदल गई। उन्होंने लिखा कि फिर कहना क्या था। नीतीश ने महफिल लूट लिया। कुर्मी समाज के सिरमौर हो गए। पिछड़ों की राजनीति एक धुरी बन गए। उन्होंने अपने प्रत्यक्ष अनुभव के आधार पर कहा कि कुर्मी चेतना रैली में नीतीश कुमार के जाने की कहानी लालू यादव द्वारा बताए गए तरीके से बिल्कुल अलग थी।

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