नालंदा जिले के दीपनगर थाना क्षेत्र के बेरौंटी नेपुरा स्थित केके यूनिवर्सिटी के कमला गर्ल्स हॉस्टल में एग्रीकल्चर की 18 वर्षीय छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत से हड़कंप मच गया। सहरसा के नया बाजार की रहने वाली महक एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट में पांचवें सेमेस्टर यानी थर्ड ईयर की छात्रा थी। उसका शव हॉस्टल के कमरे से बरामद किया गया। प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का बताया जा रहा है, लेकिन यूनिवर्सिटी कैंपस में चल रही चर्चाओं और कॉलेज प्रशासन के रवैये को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और एफएसएल की टीम ने भी मौके से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए हैं।
दो-तीन दिनों से तनाव में थी महक, अक्सर रोने की बात आई सामने
कैंपस में चल रही चर्चाओं के मुताबिक, महक पिछले दो-तीन दिनों से काफी तनाव में थी और अक्सर रोती रहती थी। बताया जा रहा है कि घटना से कुछ समय पहले वह फोन पर किसी से बहस और गाली-गलौज करते हुए भी सुनी गई थी। इससे आशंका जताई जा रही है कि वह किसी गहरी परेशानी से गुजर रही थी, लेकिन उसने अपनी परेशानी किसी से साझा नहीं की थी। पुलिस ने मामले में पूछताछ के लिए गंगा बॉयज हॉस्टल के एक छात्र को भी बुलाया है। बताया जा रहा है कि वह महक और उसकी रूममेट्स का करीबी दोस्त है। पुलिस उससे भी घटना और महक की मानसिक स्थिति को लेकर जानकारी जुटा रही है।
रूममेट्स गई थीं क्लास, कमरे में अकेली थी महक
मिली जानकारी के अनुसार, महक कमला गर्ल्स हॉस्टल के एक कमरे में दो अन्य छात्राओं के साथ रहती थी। यानी कमरे में कुल तीन छात्राएं थीं। घटना वाले दिन महक क्लास करने नहीं गई थी, जबकि उसकी दोनों रूममेट्स कॉलेज में पढ़ाई करने चली गई थीं। बताया जा रहा है कि दोपहर करीब 2 बजे महक का कमरा अंदर से बंद था। करीब ढाई घंटे बाद शाम 4:30 बजे जब कमरे का दरवाजा खोला गया तो महक अंदर मृत अवस्था में मिली। घटना के बाद उसकी दोनों रूममेट्स काफी घबरा गईं और अपना सामान दूसरे कमरे में ले जाकर रहने लगीं।
वार्डन और कॉलेज प्रशासन की भूमिका पर उठ रहे सवाल
इस घटना के बाद हॉस्टल की व्यवस्था और कॉलेज प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। सवाल यह है कि अगर महक दो-तीन दिनों से तनाव में थी और लगातार रो रही थी, तो उसकी रूममेट्स ने इसकी जानकारी वार्डन या कॉलेज प्रशासन को क्यों नहीं दी? अगर वार्डन को इस बारे में पहले से जानकारी थी तो महक के परिजनों को समय रहते सूचना क्यों नहीं दी गई? दिन के समय करीब ढाई घंटे तक छात्रा का कमरा बंद रहने के बावजूद वार्डन या केयरटेकर ने इसकी जानकारी लेने की कोशिश क्यों नहीं की, यह भी जांच का विषय है।
पहले कहा- तबीयत खराब है, फिर मौत की दी सूचना
मृतका के चचेरे भाई श्रवण ने कॉलेज प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनके मुताबिक, कॉलेज प्रशासन ने पहले परिवार को फोन कर कहा था कि महक की तबीयत बहुत खराब है और जल्द से जल्द कॉलेज पहुंचें। इसके करीब आधे घंटे बाद ही दोबारा फोन कर महक की मौत की सूचना दी गई। श्रवण ने बताया कि घटना से एक दिन पहले ही महक की अपने माता-पिता से फोन पर बातचीत हुई थी। उस दौरान वह बिल्कुल सामान्य थी और उसकी बातचीत या व्यवहार से ऐसा बिल्कुल नहीं लगा कि वह किसी बड़े तनाव में है या आत्महत्या जैसा कदम उठा सकती है। परिजनों का सवाल है कि अगर महक की तबीयत खराब नहीं थी और वह तनाव में थी, तो कॉलेज प्रशासन ने परिवार को पहले बीमारी की बात क्यों बताई? क्या मामले को दबाने या अपनी लापरवाही छिपाने की कोशिश की गई? इन सवालों का जवाब अब पुलिस की जांच के बाद ही सामने आएगा।
एफएसएल टीम ने जुटाए वैज्ञानिक साक्ष्य
घटना की सूचना मिलते ही सदर डीएसपी-1 अमरनाथ पुलिस टीम के साथ यूनिवर्सिटी परिसर पहुंचे। डीएसपी ने बताया कि फिलहाल महक की मौत के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल सका है। मौके पर एफएसएल की टीम को बुलाया गया और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए हैं। पुलिस हॉस्टल के छात्रों, वार्डन और महक के बताए जा रहे करीबी दोस्त से भी पूछताछ कर रही है। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए पावापुरी अस्पताल भेज दिया गया है। पुलिस घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
एक दिन पहले परिवार से हुई थी सामान्य बातचीत
महक की मौत की खबर मिलने के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। सहरसा से उसके परिजन नालंदा पहुंच रहे हैं। परिजनों का कहना है कि एक दिन पहले ही महक से उनकी सामान्य बातचीत हुई थी। उस बातचीत में ऐसा कोई संकेत नहीं मिला था जिससे उन्हें अंदाजा हो कि वह इतना बड़ा कदम उठा सकती है। अब पुलिस की विस्तृत जांच, कॉल डिटेल्स, मौके से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही यह साफ हो सकेगा कि महक की मौत के पीछे वास्तविक वजह क्या थी। फिलहाल पुलिस आत्महत्या की आशंका के साथ-साथ दूसरे संभावित पहलुओं को भी ध्यान में रखकर जांच कर रही है।