दुष्कर्म एवं ब्लैकमेलिंग मामले में कोर्ट ने एक अभियुक्त को दोषी पाते हुए 10 वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने इनके ऊपर 20500 रूपए का अर्थ दंड भी लगाया है और नहीं देने की स्थिति में अतिरिक्त सजा भुगतनी पड़ेगी।
रोहतास जिले में चार वर्ष पूर्व हुए एक दुष्कर्म व ब्लैकमेलिंग मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तीन जीवन लाल की अदालत ने सोमवार को ऐतिहासिक फैसला देते हुए दोषी को 10 वर्ष की सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दरअसल कोर्ट ने सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए मामले के दोषी सतीश दुबे उर्फ सतीश चंद्र को कारावास के साथ-साथ 20500 रुपए का अर्थ दंड भी लगाया है और अर्थदंड नहीं देने की स्थिति में दोषी अतिरिक्त सजा का हकदार होगा।
विज्ञापन
सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर दुष्कर्म
अभियोजन पक्ष के अनुसार पलामू जिले के पाटन थाना क्षेत्र अंतर्गत पकड़ी गांव निवासी सतीश दुबे ने 4 वर्ष पूर्व एक शादीशुदा महिला एवं उसके पति को बिहार पुलिस में नौकरी दिलाने का झांसा दिया था। इस क्रम में उसने पीड़ित महिला को बनारस स्थित एक होटल में नशीला पेय पदार्थ पिलाकर दुष्कर्म किया और घटना का एक वीडियो भी बना लिया।
वीडियो के सहारे ब्लैकमेलिंग
वहीं अभियुक्त ने होटल में बनाए गए वीडियो के सहारे पीड़ित महिला को ब्लैकमेल कर दोबारा अपने हवस का शिकार बनाया। जानकारी के अनुसार दोनों की दोस्ती सोशल मीडिया के माध्यम से हुई थी, जहां अभियुक्त ने खुद को पुलिस विभाग का बड़ा अधिकारी बताकर महिला को नौकरी दिलाने के नाम पर झांसे में लिया था।
मामले में छः लोगों की गवाही
घटना को लेकर पीड़ित महिला द्वारा डेहरी महिला थाने में 4 वर्ष पूर्व एक प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिसका ट्रायल 757/2023 के तहत चला। लोक अभियोजक विद्यासागर राय ने बताया कि इस मामले में 4 साल तक चले कानूनी प्रक्रिया और छः गवाहों के बयान के आधार पर कोर्ट ने अभियुक्त सतीश चंद्र को भारतीय दंड विधान की धारा 376 एवं 506 में दोषी पाते हुए दस वर्ष सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।