Bihar : सरकार और पटना प्रशासन का दावा है कि एलपीजी की कोई कमी नहीं है, लेकिन इसके बाद भी मिड डे भोजन अब लकड़ी के जलावन पर बनने लगा है। इसकी वजह एलपीजी की कमी बताई जा रही है।
कमर्शियल गैस की किल्लत का प्रभाव प्राथमिक और मध्य विद्यालय के मध्याह्न भोजन पर भी पड़ने लगा है। आलम यह है कि विद्यालय में अब मिड डे भोजन गैस चूल्हे पर नहीं, बल्कि लकड़ी पर बनना शुरू हो गया है। हालांकि सरकार का दावा है कि इस तरह की कोई परेशानी नहीं है। गैस की कोई किल्लत नहीं है।
ग्राउंड जीरो पर यह स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ा कि विद्यालय में मिटटी के चूल्हे बनाए गए हैं, क्यों कि अब उसी चूल्हों पर खाना बनाया जा रहा है। यह तस्वीर यारपुर स्थित राजकीय आदर्श बालक मध्य विद्यालय और राजकीय आदर्श कन्या मध्य विद्यालय यारपुर में देखी गई। इस संबंध में राजकीय आदर्श बालक मध्य विद्यालय यारपुर की प्रधानाध्यापिका शालिनी सिन्हा ने बताया कि मेरे विद्यालय में चार सिलिंडर है, जो खत्म हो चुका है। इसलिए अब मिड डे भोजन लकड़ी पर शुरू कर दिया गया है। इसके लिए हमने 1 क्विंटल लकड़ी खरीद कर मंगवाया है। उन्होंने कहा कि एक ओर जहां कमर्शियल गैस मिलना बंद हो गया है, वहीं दूसरी तरफ प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का सख्त आदेश मिला है कि मिड डे भोजन किसी भी हालत में बंद नहीं होनी चाहिए। लिहाजा जलावन के लिए लकड़ी मंगवानी पड़ी और अब उसी जलावन पर बच्चों के लिए मिड डे भोजन बन रहा है।
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वहीं राजकीय आदर्श कन्या मध्य विद्यालय यारपुर की प्रधानाध्यापिका ख्रिष्टिना दयामणि कच्छप का कहना है कि गैस सिलिंडर की उपलब्धता अब आसान नहीं रही। वेंडर को कह रहे हैं लेकिन वह सिलिंडर दे नहीं रहा है। इसलिए मिट्टी का स्थायी चूल्हा बनवा दिया गया है। अब जब तक गैस की उपलब्धता सामान्य नहीं हो जाती तब तक लकड़ी पर ही मिड डे भोजन बनेगा।
हालांकि जिला प्रशासन का कहना है कि किसी तरह की कोई दिक्कत परेशानी नहीं है। पटना के डीएम ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता जारी कर कहा है कि बाजार में हो रहे कालाबाजारी को रोकने की कोशिश की जा रही है। गैस की कोई कमी नहीं है। कुछ लोग इसे पैनिक बना रहे हैं, जिसकी कोई जरूरत नहीं है।