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Bihar News: गांव-गांव खेल का मैदान! बिहार मॉडल को केंद्र की मंजूरी, स्पोर्ट्स हब बनने की ओर बड़ा कदम

Sun, 22 Mar 2026 04:23 PM IST
Ashutosh Pratap Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

पटना में आयोजित खेल कॉनक्लेव में केंद्रीय खेल राज्यमंत्री रक्षा खडसे ने बताया कि बिहार की मनरेगा से गांव-गांव खेल मैदान बनाने की योजना को केंद्र सरकार ने भी अपना लिया है। इस पहल से ग्रामीण स्तर तक खेल सुविधाओं का विस्तार होगा और युवाओं को खेलों की ओर प्रोत्साहन मिलेगा।
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रक्षा खडसे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बिहार में खेलों को गांव स्तर तक प्रोत्साहित करने के लिए शुरू की गई मनरेगा से खेल मैदान बनाने की योजना को अब केंद्र सरकार ने भी अपना लिया है। केंद्रीय खेल राज्यमंत्री रक्षा खडसे ने पटना के ताज होटल में आयोजित खेल कॉनक्लेव में यह जानकारी दी। यह कार्यक्रम खेल विभाग के सहयोग से आयोजित किया गया था।
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गांव-गांव तक बन रहे खेल मैदान

केंद्रीय मंत्री रक्षा खडसे ने कहा कि बिहार में ग्रामीण स्तर तक मनरेगा के सहयोग से खेल मैदान या छोटे स्टेडियम बनाने की कार्ययोजना तैयार कर उसे मूर्त रूप दिया जा रहा है। अब इस मॉडल को केंद्र सरकार ने भी अपनाया है, जिससे गांव-गांव तक खेल सुविधाओं का विस्तार हो रहा है।

बिहार के हुनर को खेलों की ओर मोड़ने की जरूरत

बिहार दिवस के अवसर पर राज्यवासियों को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि बिहार हुनरमंद लोगों का राज्य है और यहां के लोगों को खेलों की दिशा में आगे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि बिहार में खेलों के प्रति काफी जुनून है, खासकर बच्चों को शुरुआती स्तर से ही स्पोर्ट्स साइंस की जानकारी दी जानी चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि स्कूल से लेकर कॉलेज स्तर तक खेल को अनिवार्य बनाया जाए और समुचित प्रशिक्षण भी दिया जाए। खेलों से युवाओं में संयम, समय प्रबंधन और नेतृत्व जैसे गुण विकसित होते हैं।
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‘खेलो भारत मिशन’ से मजबूत होगा स्पोर्ट्स इकोसिस्टम

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार विभिन्न राज्यों के साथ मिलकर खेलों को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही है। ‘खेलो भारत मिशन’ जैसी योजनाओं के जरिए देशभर में मजबूत स्पोर्ट्स इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि खेल सामग्रियों को बढ़ावा देने पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है।

स्पोर्ट्स टूरिज्म से स्थानीय स्तर पर होगा लाभ

रक्षा खडसे ने कहा कि बड़ी खेल प्रतियोगिताओं के आयोजन से स्पोर्ट्स टूरिज्म को बढ़ावा मिलता है और स्थानीय स्तर पर लोगों को आर्थिक लाभ भी होता है। ‘खेलो इंडिया’ प्रतियोगिता के तहत बिहार में कई खेलों का आयोजन किया जा चुका है, जिसमें करीब 10 हजार खिलाड़ी शामिल हुए थे। उन्होंने कहा कि भारत खेलों के क्षेत्र में वैश्विक पहचान बना रहा है और इसी क्रम में 2028 में कॉमनवेल्थ गेम तथा उड़ीसा में वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप का आयोजन प्रस्तावित है।

ओलंपिक और कॉमनवेल्थ के कुछ खेल बिहार में भी हों: श्रेयसी सिंह

राज्य की खेल मंत्री श्रेयसी सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बिहार में खेलों के विकास के लिए व्यापक काम किया गया है। खिलाड़ियों के प्रशिक्षण से लेकर बुनियादी ढांचे के विकास तक कई पहलें की गई हैं और अब यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के स्टेडियम भी तैयार हो चुके हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार से अनुरोध किया कि यदि भारत को 2036 में ओलंपिक खेलों की मेजबानी मिलती है, तो बिहार में भी एक या दो खेलों का आयोजन किया जाए। साथ ही कॉमनवेल्थ गेम के कुछ मुकाबले भी यहां आयोजित किए जाने चाहिए।

खेल उद्योग को बढ़ावा देने पर जोर

श्रेयसी सिंह ने कहा कि बिहार में खेल सामग्रियों और खेल परिधान से जुड़े उद्योग स्थापित होने चाहिए। सरकार ऐसे उद्यमियों को हर संभव सहायता प्रदान करेगी।
उन्होंने बताया कि राज्य में जिला स्तर पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं और सरकारी स्कूलों में एकलव्य केंद्र खोले गए हैं, ताकि खिलाड़ियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। उन्होंने कहा कि अब खेल को बिजली, पानी, सड़क और शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं की तरह हर घर तक पहुंचाना लक्ष्य है।

“बिहार इतिहास लिखता नहीं, रचता है”: रविंद्र शंकरण

बिहार खेल प्राधिकरण के महानिदेशक रविंद्र शंकरण ने कहा कि बिहार केवल इतिहास नहीं लिखता, बल्कि उसे रचता है। उन्होंने बताया कि बिहार में ओलंपिक आयोजन की चर्चा हो रही है, जबकि बहुत कम लोग जानते हैं कि 15 वर्षों तक इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन का कार्यालय बिहार में रहा और इसके अध्यक्ष जमशेदजी टाटा थे।

उन्होंने कहा कि बिहार के खिलाड़ी शिवनाथ सिंह ने 1968 के ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। हाल ही में तिरुअनंतपुरम में आयोजित 400 मीटर दौड़ प्रतियोगिता में बिहार के धावक पियूष राज ने स्वर्ण पदक जीतकर वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए क्वालीफाई किया है।
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उन्होंने बताया कि इस कॉनक्लेव में खेलों के विकास से जुड़े जो भी सुझाव मिलेंगे, उन्हें अप्रैल में केंद्र स्तर पर आयोजित होने वाले चिंतन शिविर में प्रस्तुत किया जाएगा। इस अवसर पर खेल विभाग के सचिव महेंद्र कुमार समेत अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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