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Bihar: CBSE री-इवैल्यूएशन में बड़ा उलटफेर, रांची की अवनी को मिले 500 में 500 अंक; बनीं नेशनल टॉपर

Mon, 22 Jun 2026 09:41 PM IST
Ashutosh Pratap Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के पुनर्मूल्यांकन परिणाम में रांची की छात्रा अवनी केजरीवाल ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। पहले उन्हें 94 प्रतिशत अंक मिले थे, लेकिन री-इवैल्यूएशन के बाद उनके अंक बढ़कर 100 प्रतिशत हो गए।
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रांची की छात्रा अवनी ने 12वीं बोर्ड में हासिल किए 100 फीसदी अंक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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रांची की छात्रा अवनी केजरीवाल ने सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 के पुनर्मूल्यांकन (री-इवैल्यूएशन) परिणाम में शानदार सफलता हासिल की है। प्रारंभिक परिणाम में उन्हें 94 प्रतिशत अंक मिले थे, लेकिन पुनर्मूल्यांकन के बाद उनके अंक बढ़कर 100 प्रतिशत हो गए हैं। कॉमर्स संकाय की छात्रा अवनी को अब 500 में से पूरे 500 अंक प्राप्त हुए हैं। उनकी इस उपलब्धि की राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है।

दिल्ली पब्लिक स्कूल की छात्रा हैं अवनी

अवनी केजरीवाल रांची स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल की छात्रा हैं। स्कूल प्रबंधन ने भी पुनर्मूल्यांकन के बाद उन्हें शत-प्रतिशत अंक मिलने की पुष्टि की है। इस उपलब्धि के बाद स्कूल में खुशी का माहौल है। 13 मई को घोषित सीबीएसई 12वीं बोर्ड परीक्षा के मूल परिणाम के बाद अवनी को लगा कि उनके प्रदर्शन के अनुसार अंक नहीं मिले हैं। इसके बाद उन्होंने सीबीएसई की निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया।

सभी विषयों में मिले पूरे अंक

सीबीएसई द्वारा हाल ही में जारी पुनर्मूल्यांकन परिणाम में उनके अंकों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। संशोधित परिणाम के अनुसार अवनी को सभी विषयों में पूर्ण अंक मिले हैं और उनका कुल स्कोर 500 में 500 हो गया है। दिल्ली पब्लिक स्कूल, रांची की प्राचार्य डॉ. जया चौहान ने इसे विद्यालय के लिए गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किसी भी छात्र की मेहनत, अनुशासन और समर्पण का परिणाम होता है।

शिक्षा जगत में भी हुई सराहना

अवनी की सफलता को लेकर शिक्षा जगत में भी सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। शिक्षाविदों का कहना है कि यह उपलब्धि छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें अपने अधिकारों और उपलब्ध प्रक्रियाओं के प्रति जागरूक भी करती है। यह उदाहरण बताता है कि यदि किसी छात्र को अपने प्रदर्शन पर भरोसा हो तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपने परिणाम की दोबारा समीक्षा करवा सकता है।

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