नालंदा स्थित मां शीतलाष्टमी मंदिर परिसर में मंगलवार को भारी कुप्रबंधन और लालच के कारण बड़ा हादसा हो गया। मंदिर के छोटे से गर्भगृह में क्षमता से अधिक भीड़ जुटने और पंडा कमेटी द्वारा 'बैक डोर' से अवैध एंट्री कराए जाने के कारण भगदड़ की स्थिति बन गई। घटना के बाद आक्रोशित भीड़ को देख पंडा कमेटी के सदस्य मंदिर परिसर छोड़ फरार हो गए। वर्तमान में पूरा मंदिर परिसर वीरान है और पूजन सामग्री मलबे की तरह बिखरी पड़ी है।
क्षमता से अधिक भीड़ और पैसों का खेल
मां शीतलाष्टमी का गर्भगृह इतना छोटा है कि वहां एक समय में बमुश्किल 20 लोग ही सुरक्षित तरीके से खड़े हो सकते हैं। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सामने चैनल गेट पर बांस की बैरिकेडिंग की गई थी। लेकिन अव्यवस्था तब शुरू हुई जब पंडा कमेटी के लोगों ने दाईं और बाईं तरफ के पिछले दरवाजे से पैसे लेकर श्रद्धालुओं को अंदर घुसाना शुरू कर दिया। घंटों से लाइन में खड़े आम श्रद्धालुओं का धैर्य तब जवाब दे गया जब उन्होंने देखा कि कतार आगे बढ़ने के बजाय पीछे के रास्ते से लोग सीधे गर्भगृह तक पहुंच रहे हैं।
धक्का-मुक्की में टूटी बैरिकेडिंग, मची चीख-पुकार
पीछे के रास्ते से लगातार आ रही भीड़ के कारण छोटे से आंगन में दबाव असहनीय हो गया। इसी गहमागहमी के बीच सुरक्षा के लिए लगाए गए बांस अचानक टूट गए। बैरिकेडिंग गिरते ही लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे, जिससे वहां अफरा-तफरी और भगदड़ मच गई। श्रद्धालुओं में अपनी जान बचाने की होड़ लग गई। और पैरों तले दबकर कुल 9 लोगों की मौत हो गई।
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ताले में बंद बेजुबान, वीरान हुआ परिसर
हादसे के बाद मंदिर का नजारा डरावना है। पंडा कमेटी के फरार होने के कारण मंदिर में कोई जिम्मेदार व्यक्ति मौजूद नहीं है। माता को चढ़ाने के लिए लाई गई दर्जनों बकरियां अब भी मंदिर के एक कमरे में बंद हैं, जिस पर बाहर से ताला लगा हुआ है। न उन्हें चारा देने वाला कोई है और न ही उनकी सुध लेने वाला। पूरा परिसर वीरान पड़ा है और चारों ओर केवल बिखरी हुई पूजन सामग्री दिखाई दे रही है, जो प्रशासनिक विफलता और प्रबंधन की लापरवाही की गवाही दे रही है।