बाढ़ के पानी में पैदल चलने को मजबूर हुए लोग।
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पटना जिले के दानापुर, बख्तियारपुर, मनेर, दीघा, फतुहा, दनियावां, मोकामा और अन्य कई स्थानों पर बाढ़ के कारण लोगों के बीच गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। इसके कारण बाढ़ पीड़ितों को भोजन और पानी के अलावा अपने पशुओं के चारे की भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ का पानी सड़कों से लेकर घरों तक पहुंच चुका है, और लगातार गंगा और सोन नदी के जलस्तर में वृद्धि हो रही है, जिसका असर मनेर, दानापुर सहित कई स्थानों पर देखा जा रहा है।
बाढ़ के कारण मनेर का पश्चिमी दियारा और उत्तरी दियारा पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है। बाढ़ से बचने के लिए दियारा के लोग, अपने छोटे-छोटे बच्चों के साथ, सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। इस पलायन की समस्या को लेकर स्थानीय प्रशासन ने कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं की है। वहीं, कई गांव में स्थानीय स्तर पर नाव चलाकर आवश्यकताओं को पूरा किया जा रहा है।
मणिनगर परिषद के अदलचक-डुमरिया और जंगलिया टोला के गांव भी बाढ़ के पानी से डूब चुके हैं। इस विषय में प्रशासन ने जो व्यवस्थाएं की हैं, उनमें कमी स्पष्ट रूप से देखी जा रही है। वहीं, बाढ़ के कारण दियारा के कई स्कूलों को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया है, जिससे स्कूली बच्चों को पढ़ाई में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
इधर, मनेर के विधायक भाई वीरेंद्र ने प्रखंड कार्यालय में प्रतिनिधियों और अधिकारियों के साथ बैठक कर बाढ़ प्रभावित गांवों की समस्याओं पर चर्चा की। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि सबसे अधिक समस्या लोगों के बीच मवेशियों के चारे की है, और उन्हें पीने के पानी की भी कमी का सामना करना पड़ रहा है। इस पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। बैठक में बीडीओ अभिषेक प्रभाकर, सीओ पूजा कुमारी, मुखिया अशोक सिंह, लाल किशोर सिंह, शैलेश कुमार समेत कई लोग उपस्थित थे।