ऊपर की यह तस्वीर ध्यान से अगर आपने देखी होगी तो इसके वायरल वीडियो को भी जरूर देख चुके होंगे। यह जमुई में नाबालिग लड़की से सरेराह बदसलूकी के दो मुख्य आरोपी हैं। नाबालिग लड़की के वीडियो को वायरल करने वालों पर कार्रवाई का दावा है, लेकिन अब इन गिरफ्तार आरोपियों के वीडियो भी वायरल हैं। कहा जा रहा है कि गोली से घायल आरोपी अगले दिन कोर्ट में पेशी के लिए ठीकठाक पैदल भाग रहा है। लेकिन, 'अमर उजाला' ने जब वीडियो के पीछे तथ्यों की पड़ताल शुरू की तो पुलिस की बनाई कहानी सामने आई। ऐसी कहानी, जिसने रोहिणी आचार्य तक को गच्चा दे दिया।
सोशल मीडिया पर घिर गई बिहार पुलिस
जमुई में नाबालिग छात्रा से कथित बदसलूकी और उसका वीडियो वायरल होने के मामले में जमुई पुलिस की कार्रवाई अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। खासकर 22 सितंबर की सुबह मुख्य आरोपित नंदन यादव के पैर में गोली लगने की घटना को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। सोशल मीडिया पर कुछ लोग दावा कर रहे हैं कि जब नंदन के पैर में गोली लगी थी तो वह सरपट कैसे दौड़ रहा था? कुछ इसे हरेराम यादव बता रहे। खास बात यह भी गोली लगने की जानकारी दोनों के बारे में शेयर की जा रही। इसी कारण पुलिस सोशल मीडिया पर घिरी हुई दिख रही है।
तस्वीर में कौन नंदन, कौन हरेराम?
ऊपर की तस्वीर में जो विभिन्न रंग वाले कपड़े के नकाब में चेहरा ढंके स्ट्रेचर पर लेटा है, वह नंदन यादव है। पुलिस ने इसी का हाफ एनकाउंटर किया था। यानी, पैर में गोली मारी थी। इसी की औपचारिक सूचना दी गई थी। जो भगवा रंग के गमछे में चेहरा ढंक कर टांगते हुए लाया जा रहा है, वह हरेराम यादव है। उसके हाफ एनकाउंटर या उसे गोली लगने की कोई औपचारिक जानकारी कभी नहीं दी गई।
फिर, गोली की बात से कैसे मचा बवाल
दरअसल, 22 सितंबर को पुलिस को सुबह सूचना मिली थी कि मामले का आरोपित हरेराम यादव प्रतापपुर गांव के बाहर जमुई-लखीसराय सीमा रेखा पर कुंदर बराज के पास नदी में कांश की झाड़ियों में छिपा है। इसके बाद टाउन थाना, बरहट थाना और लक्ष्मीपुर थाना की पुलिस ने संयुक्त रूप से इलाके की घेराबंदी की। पुलिस की घेराबंदी देख हरेराम यादव भागने लगा। इसी दौरान वह गिर पड़ा और उसके पैर में चोट लगी। पुलिस ने उसे पकड़ लिया। इसके बाद उसे इलाज के लिए जमुई सदर अस्पताल ले जाया गया। पुलिस का कहना है कि हरेराम के पैर में गंभीर फ्रैक्चर जैसी बात नहीं थी, लेकिन भीड़ के आक्रोश से बचाने के लिए उसे टांग कर लाया गया था। भीड़ में लोग उसे गोली लगने की बात कह रहे थे, लेकिन पुलिस ने प्रत्यक्ष रूप से ऐसा एक बार भी नहीं कहा। गोली की चर्चा के कारण वह आसानी से अस्पताल तक पहुंचाया जा सका।
जिसे गोली लगी, वह स्ट्रेचर पर लाया गया
गिरने से घायल होने के बाद पुलिस गिरफ्त में आए हरेराम से पूछताछ की गई। उसने ही नंदन यादव के झाड़ियों में छिपे होने की जानकारी दी। इसके बाद टीम बताए गए स्थान पर पहुंची। पुलिस का दावा है कि नंदन यादव ने टीम को देखते ही फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में उसके पैर में गोली लगी और उसे गिरफ्तार कर सदर अस्पताल लाया गया। नंदन यादव इस कांड में सबसे बड़ा आरोपी था। सबसे ज्यादा उसे ही कुकृत्य करते लोगों ने वीडियो में देखा। उसे पुलिस स्ट्रेचर पर लेकर आई। अब भी वह चलने की स्थिति में नहीं है।
कहां फंस गए सोशल मीडिया के स्टार?
मुख्य धारा की मीडिया पर सवाल उठाने वाले सोशल मीडिया स्टार कैसे गुमराह करते हैं या गलत जानकारी फैलाते हैं, यह फिर सामने आया। सोशल मीडिया पर सवाल खड़ा किया गया कि पहले दिन बुरी तरह घायल और टांग कर लाया गया शख्स अगले दिन पैदल भाग कैसे सकता है? दरअसल, यहां दो अलग-अलग घटनाओं को एक साथ जोड़कर देखा जा रहा है। पुलिस के अनुसार हरेराम को गोली नहीं लगी थी, बल्कि भागने के दौरान गिरने से पैर में चोट लगी थी। वहीं नंदन यादव के पैर में पुलिस की जवाबी कार्रवाई के दौरान गोली लगी। बाद में हरेराम यादव को इलाज के बाद बुधवार शाम कोर्ट में पेश किया गया। पुलिस का कहना है कि उसके पैर में हल्की चोट थी और पैर टूटने की बात अफवाह है।
(इनपुट- सेंटू कुमार, जमुई)