मिड-डे मील के चावल पर मचा बवाल
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बाढ़ प्रखंड के मासूमगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को मिलने वाले मिड-डे मील के चावल की कथित तौर पर बिक्री का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि 2 अक्टूबर को सार्वजनिक अवकाश होने के बावजूद विद्यालय खोला गया और स्कूल में रखे एमडीएम के चावल को बाजार में बेचने की कोशिश की गई। ग्रामीणों ने रसोइया को चावल ले जाते हुए पकड़ लिया और पूरी घटना का वीडियो भी बनाया। मामला सामने आने के बाद इलाके में नाराजगी है और लोग उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं।
छुट्टी के दिन स्कूल खोलने का आरोप
स्थानीय ग्रामीण दीपक कुमार ने बताया कि 2 अक्टूबर को स्कूल की छुट्टी थी, इसके बावजूद प्रधानाध्यापिका ने विद्यालय खोला। आरोप है कि उन्होंने एमडीएम का चावल रसोइया को दिया, जिसके बाद वह उसे लेकर बाहर एक दुकान पर बेचने के लिए पहुंची। ग्रामीणों को जब इसकी जानकारी मिली तो वे मौके पर पहुंच गए। लोगों ने विरोध शुरू कर दिया और घटना का वीडियो बनाने लगे। ग्रामीणों के मुताबिक, वीडियो बनता देखकर प्रधानाध्यापिका वहां से निकल गईं।
चावल बेचने को लेकर ग्रामीणों का हंगामा
मौके पर मौजूद लोगों ने रसोइया से चावल ले जाने का कारण पूछा। इसी दौरान रसोइया का बेटा ग्रामीणों से उलझ गया और विवाद बढ़कर हाथापाई तक पहुंच गया। घटना का वीडियो भी ग्रामीणों की ओर से बनाए जाने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों और स्थानीय वार्ड सदस्य का कहना है कि विद्यालय से अनाज बाहर ले जाने का यह पहला मामला नहीं है। उनका आरोप है कि पहले भी ऐसी घटनाएं सामने आती रही हैं।
बच्चे ने बताया- कुछ दिन पहले 9 बोरा चावल ले जाया गया
एक स्थानीय स्कूली बच्चे ने दावा किया कि कुछ दिन पहले ई-रिक्शा पर लादकर करीब नौ बोरा चावल स्कूल से बाहर ले जाया गया था। इस घटना के बाद भी ग्रामीणों ने विरोध जताया था। वार्ड सदस्य ने भी ग्रामीणों के आरोपों की पुष्टि करते हुए कहा कि विद्यालय में पहले भी कई बार अनाज से जुड़ी ऐसी शिकायतें सामने आ चुकी हैं। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
रसोइया बोली- सफाई के बदले मिला था एक बोरा चावल
चावल के साथ पकड़े जाने के बाद रसोइया ने ग्रामीणों के सामने अपनी अलग सफाई दी। उसका कहना था कि सार्वजनिक अवकाश के बावजूद वह स्कूल में सफाई का काम करने गई थी। उसके मुताबिक, सफाई की मजदूरी के बदले प्रधानाध्यापिका ने उसे एक बोरा चावल दिया था। रसोइया ने दावा किया कि उसे दिया गया चावल खराब था और खाने लायक नहीं था। इसी वजह से वह उसे बाजार में बेचने के लिए ले जा रही थी।
जांच और कार्रवाई की मांग
छुट्टी के दिन विद्यालय खोलने और सरकारी योजना के तहत बच्चों को दिए जाने वाले चावल को बाजार में बेचने के आरोपों से ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में स्कूल में छुट्टी के दिन गतिविधि होने, चावल दिए जाने और पहले लगाए गए आरोपों की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।