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आज यह सायरन क्यों?: बिहार में आज कहां-कब सुनाई देगी अलार्म की आवाज, इस ट्रायल का मतलब भी समझिए

Tue, 06 Oct 2026 11:28 AM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना

सार

Bihar News: कोई खतरा मंडरा रहा है क्या? पाकिस्तान से तनाव की स्थिति में सायरन बजा था। आज क्यों बजने वाला है, कहां-कब सुनाई देगी सायरन की आवाज? इस खबर में जानिए आपदा प्रबंधन की इस तैयारी के पीछे कारण।
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आज बजेगा सायरन सिस्टम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी पटना में मंगलवार दोपहर एक से दो बजे के बीच सायरन की आवाज सुनाई देगी। नागरिक सुरक्षा निदेशालय ने लोगों से अपील किया कि अगर आपके इलाके में भी दोपहर के समय सायरन सुनाई दे तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह किसी खतरे या आपात स्थिति का संकेत नहीं होगा, बल्कि नागरिक सुरक्षा व्यवस्था में लगाए गए नए आपातकालीन सायरन सिस्टम की तकनीकी जांच की जाएगी। नया सायरन सिस्टम न्यू पुनाईचक स्थित नागरिक सुरक्षा निदेशालय के नियंत्रण कक्ष में लगाया गया है। परीक्षण के दौरान अलग-अलग निर्धारित संकेतों को बजाकर व्यवस्था की कार्यक्षमता जांची जाएगी। इनमें खतरे की चेतावनी और खतरा टलने का संकेत देने वाली ध्वनियां शामिल हैं। सायरन की आवाज करीब दो से तीन किलोमीटर के दायरे तक पहुंचने की क्षमता बताई गई है। 

 

सायरन सुनाई दे तो क्या करें?

आज होने वाला परीक्षण केवल तकनीकी प्रक्रिया का हिस्सा है। इसलिए सायरन सुनकर लोगों को अपने स्तर से कोई कदम उठाने की जरूरत नहीं है। नागरिक सुरक्षा निदेशालय ने लोगों से अपील की है कि वह किसी तरह की अफवाह पर भरोसा न करें और सायरन की आवाज को वास्तविक खतरे से जोड़कर न देखें।आपदा विभाग ने साफ किया है कि इस परीक्षण का किसी वास्तविक आपदा, हवाई हमले, आग, बाढ़, भूकंप या अन्य आपात स्थिति से संबंध नहीं है। 

 

आठ-नौ तरह के सायरन संकेत, जरूरत पड़ने पर सूचना भी पहुंचा सकेंगे

नई व्यवस्था को केवल चेतावनी देने वाले सायरन के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसमें अलग-अलग परिस्थितियों के लिए विभिन्न ध्वनि संकेतों की व्यवस्था है। परीक्षण के दौरान इन संकेतों को बजाकर यह देखा जाएगा कि सिस्टम ठीक तरह से काम कर रहा है या नहीं। इस व्यवस्था के जरिए भविष्य में आपात स्थिति से संबंधित सूचना और निर्देश भी लोगों तक पहुंचाने की क्षमता विकसित की जा रही है। फिलहाल पटना में इसकी तकनीकी क्षमता की जांच की जा रही है। 

 

पटना में पहले कब हुआ था सायरन और ब्लैकआउट का मॉक ड्रिल?

पटना में सायरन और नागरिक सुरक्षा अभ्यास पहले भी हो चुका है। हाल का बड़ा अभ्यास 14 मई 2026 को हुआ था। उस दिन पटना समेत बिहार के छह जिलों में ब्लैकआउट मॉक ड्रिल कराई गई थी। इसका उद्देश्य आपात या युद्ध जैसी परिस्थितियों में नागरिक सुरक्षा तंत्र की तैयारियों को परखना था। 14 मई के अभ्यास में निर्धारित समय पर सायरन बजाने के साथ कुछ इलाकों में बिजली की रोशनी बंद कराई गई थी। पटना के अलावा बिहार के अन्य जिलों में भी नागरिक सुरक्षा से जुड़े इंतजामों की जांच की गई थी। 

 

2025 में भी पटना में हुआ था बड़ा अभ्यास

इससे पहले सात मई को भी पटना में नागरिक सुरक्षा मॉक ड्रिल आयोजित हुई थी। उस दौरान सायरन बजने के बाद शहर में ब्लैकआउट का अभ्यास किया गया था। इसका मकसद लोगों और प्रशासन को ऐसी स्थिति के लिए तैयार करना था, जिसमें अचानक आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने की जरूरत पड़े। यानी पटना में पिछले कुछ वर्षों में सायरन का इस्तेमाल मुख्य रूप से नागरिक सुरक्षा अभ्यास के दौरान हुआ है। छह अक्टूबर को होने वाला कार्यक्रम इन मॉक ड्रिल से अलग है। इस बार मुख्य उद्देश्य नई सायरन प्रणाली की तकनीकी जांच करना है।

 

आज का सायरन टेस्ट क्यों महत्वपूर्ण?

नागरिक सुरक्षा निदेशालय की ओर से बताया गया कि आपात स्थिति में शुरुआती चेतावनी जितनी जल्दी लोगों तक पहुंचे, नुकसान को नियंत्रित करने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। इसी उद्देश्य से नागरिक सुरक्षा व्यवस्था में सायरन जैसे तंत्र की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पटना में लगाए गए नए सिस्टम की जांच से यह पता चलेगा कि अलग-अलग चेतावनी संकेत कितनी प्रभावी तरीके से प्रसारित किए जा सकते हैं। इसलिए मंगलवार अक्टूबर को दोपहर एक से दो बजे के बीच सायरन सुनाई दे तो इसे लेकर न डरें, न अफवाह फैलाएं। यह सिर्फ सिस्टम का टेस्ट है।

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