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पुलिस ने लगाये गलत आरोप, एक लाख जुर्माना

Sat, 02 Feb 2013 04:10 PM IST
पटना/इंटरनेट डेस्क
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जेल में बंद रहकर किसी व्यक्ति ने पांच-पांच डकैतियां कीं। यह सुनने में तो असंभव लगता है पर सीतामढ़ी जिले के रीगा थाने में पुलिस ने यह काम कर दिखाया। यह खुलासा राज्य मानवाधिकार आयोग ने किया और आरोपी पुलिसकर्मियों पर एक लाख रूपये जुर्माना लगाया।  
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मामला अजिज नट नाम के एक व्यक्ति का है जिस पर पांच आरोप लगाये गये थे लेकिन आयोग की जांच में उसके उस समय जेल में मौजूद होने का पता चला। राज्य मानवाधिकार आयेग की पूछताछ पर रीगा थानाध्यक्ष ने कहा कि अजिज नट जिस मामले में आरोपित है, उसमें उसकी संलिप्तता है। जब थानाध्यक्ष से पूछा गया कि वारदात के समय तो वह जेल में बंद थे तो थानाध्यक्ष इसका जवाब नहीं दे पाये।

मानवाधिकार आयोग ने अलग-अलग डकैती के मामलों में जेल में डाले गये अजीज नट के खिलाफ सभी आरोपों को फर्जी करार दिया है। इस मामले में दोषी पाये गये चारों पुलिसकर्मियों पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माने की राशि अजिज नट को मिलेगी। आयोग के सदस्य नीलमणि ने बताया कि एसपी ने उन्हें शुक्रवार को जानकारी दी कि अजीज नट दो आरोपों से बरी हो गया है। तीन अन्य मामलों में पुलिस ने आरोप पत्र पर फाइनल रिपोर्ट सौंपने का निर्णय लिया है। सीतामढ़ी के डीएम को 28 फरवरी तक जुर्माने की राशि वसूल कर मुआवजे का भुगतान करने के लिए कहा गया है।
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जांच में पता चला कि अजिज नट को जान-बूझकर गलत मामले में फंसाया गया है। आयोग ने जब इस मामले की सुनवाई शुरू की, तो रीगा के थानाध्यक्ष अनिरूद्ध प्रसाद सिंह, एसआइ ठाकुर देवेंद्र सिंह, वकील सिंह व अरविंद कुमार सीधे तौर पर दोषी पाये गये। आयोग ने सीतामढ़ी के एसपी को कहा कि वे तीन महीने के भीतर इस मामले की सुनवाई करें। जो भी कानून का बेजा इस्तेमाल करते पाया जाये, उसे कोर्ट के समक्ष पेश किया जाये। आयोग ने चारों पुलिसकर्मियों के खिलाफ एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया।
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