कांग्रेस के साथ जदयू की बढ़ती निकटता को देखते हुए भाजपा बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति और आक्रामक हो गई है।
पार्टी ने आरोप लगाया कि 27 अक्तूबर को नरेंद्र मोदी की प्रस्तावित ‘हुंकार रैली’ में खलल डालने की साजिश के तहत नीतीश ने पटना में उसी दिन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यक्रम आयोजित करवा दिया है।
राष्ट्रपति के स्वदेश लौटने पर भाजपा उनसे मिलकर आग्रह करेगी कि वे जदयू के ऐसे किसी षड्यंत्र का शिकार नहीं बनें। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि मोदी को निशाना बनाने के लिए नीतीश अब राष्ट्रपति के कंधे का सहारा ले रहे हैं। मोदी की रैली पटना के गांधी मैदान में है।
उसी दौरान उसी इलाके में राष्ट्रपति को भी एक कार्यक्रम में शामिल होना है। भाजपा को आशंका है कि राष्ट्रपति की सुरक्षा का बहाना बनाकर लोगों को रैली में आने से रोका जा सकता है।
ऐसे में यदि पुलिस और आम जनता के बीच कोई अप्रिय घटना हो गई तो जदयू सरकार इसका ठीकरा मोदी पर फोड़ देगी। इस आशंका से चिंतित भाजपा ने नीतीश पर हमले तेज कर दिए हैं।
पार्टी प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार हमेशा से दूसरे दलों की रैलियों में बाधा डालने के लिए इसी तरह की हरकतें करते रहे हैं।
मसलन, राजद की रैली होने पर वे उसी दिन कैबिनेट से बड़ा फैसला करवा लेते थे और रैली से ज्यादा सुर्खियां बटोर लेते थे।
उन्होंने दावा किया कि बिहार के मुख्यमंत्री के इन हथकंडों के बावजूद मोदी की हुंकार रैली इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी रैली साबित होगी।
शाहनवाज ने इस दलील को खारिज कर दिया कि राष्ट्रपति का बिहार में 26 व 27 अक्तूबर का कार्यक्रम प्रदेश सरकार का नहीं है और यह एक गैर सरकारी संस्था का है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बिहार के दौरे पर आ रहे हैं तो उनके दर्जे के अनुसार राज्य सरकार को व्यवस्थाएं करनी ही हैं। इसलिए तय है कि राज्य सरकार की सहमति से यह कार्यक्रम बनाया गया।
राष्ट्रपति भवन से तय हुआ राष्ट्रपति का कार्यक्रम
बिहार के मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने कहा कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के बिहार में 26 और 27 अक्तूबर के कार्यक्रम को राष्ट्रपति भवन ने जुलाई माह के अंत में ही अंतिम रूप दे दिया था।
इस बारे में प्रदेश सरकार से कोई सलाह मशविरा नहीं किया गया। ऐसे में कार्यक्रम के निर्धारण में उनकी कोई भूमिका नहीं है। भाजपा केवल पब्लिसिटी के लिए सनसनी फैला रही है।