गांधी मैदान की हुंकार रैली में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोल अपने बनवास का हिसाब चुकता कर लिया।
नीतीश को पीठ पर छुरा भोंकने वाला अवसरवादी नेता करार देते हुए मोदी हमले के क्रम में राजद मुखिया लालू प्रसाद की प्रशंसा भी करने से नहीं चूके।
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पार्टी से 17 साल पुराना संबंध तोड़ने पर कटाक्ष करते हुए मोदी ने कहा कि जो अपने गुरु जयप्रकाश नारायण और राममनोहर लोहिया की पीठ पर छुरा भोंक सकता है, वह आसानी से भाजपा को भी छोड़ सकता है। उन्हें नहीं पता कि लोहिया-जेपी के अनुयाई क्या करेंगे, मगर इन नेताओं की आत्मा कभी उन्हें माफ नहीं करेगी।
हालत यह थी कि मोदी ने अपने भाषण का आधा समय नीतीश पर तीखा हमला करने में बिताया। खास बात यह रही कि इस दौरान मोदी ने नीतीश का एक बार भी नाम नहीं लिया और उन्हें मेरे मित्र कह कर पुकारते रहे।
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हुंकार रैली में मोदी के निशाने पर नीतीश ही रहे। पूरे भाषण में उन्होंने न केवल नीतीश पर तीखा हमला बोला, बल्कि कई बार नसीहतें भी देने से नहीं चूके। साथ ही बिहार न आने देने पर नीतीश को यह बताने से नहीं भूले कि बिहार को जंगलराज से मुक्ति दिलाने में बाधा नहीं पड़ने देने के कारण ही वह अपमान का घूंट पीते रहे
मोदी ने इस दौरान नीतीश की कांग्रेस से बढ़ती नजदीकियों पर भी कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि जिनके गुरुओं ने जिस कांग्रेस के खिलाफ उम्र भर संघर्ष किया, मेरे मित्र उसी कांग्रेस के सहारे प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे हैं।
तस्वीरों में देखिए: हुंकार से पहले हाहाकार
अप्रत्यक्ष रूप से कुछ साल पहले भाजपा नेताओं को भोज का निमंत्रण निरस्त करने का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि मेरे यह मित्र जब गुजरात आए तब उन्होंने उनकी खूब खातिरदारी की क्योंकि अतिथि की सेवा भारत की संस्कृति का हिस्सा है।
इस दौरान इशारों इशारों में मोदी ने संस्कार और संस्कृति के मामले में नीतीश को लालू से सबक सीखने की नसीहत भी दे डाली। मोदी ने किसी दल का नाम लिये बगैर कहा कि कुछ दल तो ऐसे भी हैं, जो जाति के आधार पर लोगों को तोड़ने में लगे हुए हैं।
उन्होंने कहा कि वह और उनकी पार्टी लोगों को जोड़ने में विश्वास रखती है और उसका यह मंत्र भी है- सबका साथ सबका विकास। भाजपा नेता ने कहा कि कुछ लोगों को भले ही गरीबी और भूख का पता नहीं है लेकिन गरीब परिवार में जन्म लेने के कारण उन्होंने गरीबी देखी है और उसे जिया है। वह भूख और गरीबी को अच्छी तरह से जानते है।
उन्होंने कहा कि बिहार से कई रेल मंत्री हुए हैं लेकिन शायद उन्हें रेल के डिब्बे में चाय बेचने वाले गरीब की मुसीबत का इतना पता नहीं होगा, जितना वह जानते है क्योंकि बचपन से ही उन्होंने इन मुसीबतों को देखा है।
यादवों के साथ दोस्ती का पैगाम
भगवान श्रीकृष्ण की द्वारका से संबंधित उदाहरण देकर मोदी ने उनके यदुवंश यानी यादवों के साथ दोस्ती का पैगाम दिया। उन्होंने बिहार व उत्तर प्रदेश के यादवों से कहा कि हमें श्रीकृष्ण के कार्य को आगे बढ़ाना है।
मुस्लिमों पर मेहरबान दिखे मोदी
किसी भी रैली में पहली बार सीधे मुस्लिम समुदाय का जिक्र कर मोदी ने दो टूक कहा कि बिहार की बजाए गुजरात में वे ज्यादा खुशहाल हैं। कच्छ व भरुच जिलों का उदाहरण देकर मोदी ने कहा कि गुजरात के इन मुस्लिम बहुल जिलों का सबसे ज्यादा विकास हो रहा है।
उन्होंने कहा कि गुजरात से हज पर जाने वाले भाइयों का कोटा छह हजार है जबकि 40 हजार आवेदन आते हैं। बिहार का कोटा 7500 के आसपास है, लेकिन आवेदन छह हजार आते हैं। इससे साफ है कि बिहार के मुस्लिम भाइयों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं है।