जीतनराम मांझी बिहार की नई एनडीए सरकार से हैं। मांझी का कहना है कि नीतीश सरकार में 'हम-एस' को उचित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है।वहीं, एनडीए की बिहार की सहयोगी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी(रालोसपा) भी नई सरकार के कैबिनेट से नाराज बताई जा रही है।
जीतनराम मांझी ने तो खुलकर कहा कि बिहार की कैबिनेट में उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं मिला। जबकि लोजपा के पास तो केंद्र में भी मंत्रालय है। उसके सांसद भी हैं। इसके बावजूद रामविलास पासवान के भाई को बिहार सरकार में मंत्री बनाया गया है, जबकि वो विधानसभा-विधानपरिसद के सदस्य भी नहीं हैं।
LJP already has minister in the Centre and has MPs also, still it was given representation in Bihar Govt: Jitan Manjhi,HAM pic.twitter.com/ykOAJLu6qy
— ANI (@ANI_news) July 31, 2017
जीतनराम मांझी अपने बेटे को सही जगह न देने से नाराज हैं। वहीं, रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व नहीं दिए जाने से नाराज हैं। दरअसल, NDA के कोटे से 13 मंत्री बनाए गए हैं। इसमें से 12 मंत्री बीजेपी के हैं, और एक मंत्री एलजेपी से। एलजेपी की ओर से रामविलास पासवान के भाई पशुपति कुमार पारस को मंत्री बनाया गया है। हालांकि वो विधानसभा या विधानपरिसद में से किसी के भी सदस्य नहीं हैं।
मौजूदा नीतीश सरकार में 71 विधायक जेडीयू के हैं। बीजेपी के 53 विधायक व एनडीए में आने वाले दलों के 5 विधायक हैं। इसमें लोजपा के दो, रालोसपा के दो और हम-एस का एक विधायक है। इस तरह लोजपा के बराबर दो विधायक होने के बावजूद रालोसपा को बिहार विधानसभा में मंत्री कोटा नहीं मिला है। उन्होंने दो मंत्री पद मांगे थे, पर बीजेपी एक पद देने पर सहमत हुई थी। इसके लिए रालोसपा ने सुधांशु शेखर का नाम भेजा था, पर नीतीश कुमार सुधांशु के नाम पर सहमत नहीं हुए और उन्हें मंत्री नहीं बनाया।